पंचायतीराज और नगर निकाय चुनाव में फर्जी मतदान को रोकने के लिए राज्य चुनाव आयोग ने इस बार कड़े प्रावधान किए हैं। अगर पोलिंग एजेंट को किसी मतदाता पर शक होता है कि वह मतदाता किसी और क्षेत्र का है और फर्जी मतदान करने लिए पोलिंग बूथ में आया है तो वह उसे चैलेंज वोट के माध्यम से रोक सकता है। चुनाव आयोग ने फर्जी मतदान रोकने के लिए यह व्यवस्था की है।
इस प्र्रक्रिया के तहत अगर कोई व्यक्ति मतदान करने आया है और प्रत्याशियों के पोलिंग एजेंट को लगता है कि वह व्यक्ति किसी दूसरे गांव से फर्जी वोट डालने के लिए आया है तो पोलिंग एजेंट उसके वोट को पीठासीन अधिकारी के सामने चैलेंज कर सकता है। इसके एवज में पीठासीन अधिकारी मतदान करने आए व्यक्ति से चार से पांच सवाल पूछेगा। इसमें मतदाता और उसके आसपास की जानकारी शामिल होगी।
मतदान करने आया व्यक्ति अगर सही जवाब दे देता है तो उसे मतदान करने दिया जाएगा। अगर जवाब गलत होते हैं तो उसे पुलिस के हवाले कर दिया जाएगा। किसी भी मतदाता की पहचान पर सवाल उठाने के लिए पोलिंग एजेंट को पीठासीन अधिकारी के पास 20 रुपये जमा करवाने होंगे।
अगर पोलिंग एजेंट का शक सही निकलता है तो उससे लिए गए 20 रुपये वापस भी लौटा दिए जाएंगे। वीरवार को राज्य चुनाव आयोग ने सभी जिला उपायुक्तों को इस बाबत आदेश भी जारी कर दिए हैं। इसके अलावा नगर निकाय चुनावों में इस्तेमाल किए जाने वाली ईवीएम के बारे में भी आदेश दिए गए हैं।