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Shimla News: चंद्र कुमार बोले- घटिया निर्माण के कारण भीषण तबाही, अधिकारियों व ठेकेदारों की जिम्मेदारी हो तय

Tue, 11 Jul 2023 09:05 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला

सार

कृषि मंत्री चंद्र कुमार ने कहा कि घाटी में नदी के किनारे अवैध रूप से निर्माण हो रहा है। नदी नाले रास्ता बदल रहे हैं, जिससे भीषण तबाही हुई है। ब्यास नदी के किनारे अतिक्रमण करके पांच सितारा होटल बनाने की होड़ मची हुई थी।
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कृषि मंत्री चंद्र कुमार - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कृषि मंत्री चंद्र कुमार ने कहा कि कुल्लू घाटी में ब्यास के तटबंधों पर अवैध तरीके से बनाए गए होटलों और रिहायशी भवन नदी की जलधारा में समा गए। घाटी में नदी के किनारे अवैध रूप से निर्माण हो रहा है। नदी नाले रास्ता बदल रहे हैं, जिससे भीषण तबाही हुई है। ब्यास नदी के किनारे अतिक्रमण करके पांच सितारा होटल बनाने की होड़ मची हुई थी। इसके अतिरिक्त फोरलेन निर्माण के दौरान निकली मिट्टी ब्यास नदी में डाली गई। नदी के वास्तविक बहाव के साथ छेड़छाड़ हुई, जो विनाश का कारण बनी है।

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सचिवालय में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि स्वयं कुल्लू घाटी में देखा है कि बड़े पैमाने पर नियमों को ताक पर रखकर अवैध निर्माण हुआ है। एक-डेढ़ दशक पहले बने पुल पानी में समा गए। उन्होंने कहा कि मंत्रिमंडल की बैठक में कुल्लू-मंडी जिलों में हुई भीषण तबाही पर चर्चा की जाएगी। नदियों के साथ कार्य प्रतिबंधित करने की जरूरत है। नियमानुसार नदी के साथ 25 मीटर तक किसी प्रकार का कोई निर्माण नहीं हो सकता है। उन्होंने कहा कि घटिया निर्माण से भी पुल और भवन गिरे हैं। ऐसे ठेकेदारों के साथ-साथ उस निर्माण से जुड़े सरकारी अधिकारी की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। इस प्रकार के सभी ठेकेदारों पर भारी जुर्माना लगाया जाना चाहिए और उन्हें ब्लैक लिस्ट करना पड़ेगा।
 

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कृषि क्षेत्र को 83 करोड़ के नुकसान का प्रारंभिक अनुमान : चंद्र

मूसलाधार बारिश ने हिमाचल में तबाही मचाई है। इससे कृषि विभाग के प्रारंभिक अनुमान में फसलों को 83 करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ है। कृषि एवं पशुपालन मंत्री चंद्र कुमार ने कहा कि केंद्र को हिमाचल में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए इसे राष्ट्रीय आपदा घोषित कर बचाव एवं राहत कार्यों के लिए विशेष आर्थिक पैकेज जारी करना चाहिए। चंद्र कुमार ने कहा कि प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार राज्य में प्रभावित कुल 28,495 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र में से 6,978 हेक्टेयर में सब्जी उत्पादन को लगभग 40 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। मक्का, धान, रागी, बाजरा और खरीफ दलहन को लगभग 21,517 हेक्टेयर पर करीब 17 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।

इसके अलावा खेती की जमीन बह जाने और खेतों में आई गाद के कारण फसलों को लगभग 26 करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान है। सबसे ज्यादा नुकसान मंडी जिले में हुआ, जो 23.38 करोड़ रुपये आंका गया है। इसके बाद शिमला में 17.63 करोड़ रुपये, सिरमौर में 13.29 करोड़ रुपये, सोलन में 8.16 करोड़ रुपये, लाहौल स्पीति में 5.74 करोड़ रुपये, कुल्लू में 4.38 करोड़ रुपये, कांगड़ा में 3.99 करोड़ रुपये, ऊना में 2.99 करोड़ रुपये, चंबा में 1.53 करोड़ रुपये, बिलासपुर में 1.01 करोड़ रुपये, किन्नौर में 59 लाख रुपये और हमीरपुर में 29 लाख रुपये का नुकसान हुआ।

चंद्र कुमार ने कहा कि कृषि और पशुधन के नुकसान के संबंध में उपनिदेशकों को अंतिम रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिए गए। बैठक में शाहपुर के विधायक केवल सिंह पठानिया, निदेशक कृषि डॉ. राजेश कौशिक और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
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