सूतक काल लगते ही छोटी काशी के मंदिरों के कपाट रहे बंद
मंडी शहर में मंगलवार को लगने वाले चंद्र ग्रहण का व्यापक असर देखा गया। होली जैसे बड़े पर्व के बीच पड़ने वाले इस ग्रहण के कारण धार्मिक आस्थाओं के चलते शहर के प्रमुख मंदिरों के कपाट पूजा-अर्चना के बाद सुबह बंद कर दिए गए। हालांकि, श्रद्धालुओं को मंदिर परिसर में प्रवेश की अनुमति थी, लेकिन मूर्तियों के स्पर्श और नियमित पूजा-अर्चना पर पूरी तरह रोक लगी। हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार, चंद्र ग्रहण के दौरान सूतक काल ग्रहण शुरू होने से पहले प्रभावी होता है। इसी परंपरा का पालन करते हुए मंडी के मंदिरों में निर्धारित समय पर कपाट बंद कर दिए गए। मान्यता है कि इस अवधि में वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और इससे बचाव के लिए मंदिरों में विशेष सावधानी बरती जाती है।
मंडी शहर अपनी गहरी धार्मिक परंपराओं के लिए जाना जाता है। प्रशासन और मंदिर समितियों ने स्पष्ट किया कि ग्रहण समाप्ति के बाद विशेष पूजा और आरती का आयोजन किया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के जुटने की उम्मीद है। भीमाकाली माता मंदिर समिति के प्रधान पुष्पराज शर्मा ने बताया कि सूतक काल लगते ही मंदिरों में नियमित पूजा-पाठ स्थगित कर दिया जाता है। श्रद्धालुओं को घरों में भी मूर्ति पूजा न करने और केवल मंत्र जाप या ध्यान करने की सलाह दी जाती है। ग्रहण समाप्ति के बाद पूरे मंदिर परिसर की विधिवत शुद्धि की जाएगी और उसके बाद ही कपाट खोले जाएंगे। इस बार चंद्र ग्रहण के चलते मंदिर में आरती साढ़े छह के बजाय मंगलवार को सात बजे होगी। महामृत्युंजय मंदिर के पुजारी दीपक शर्मा ने बताया कि मंदिर का गर्भगृह बंद रखा गया, जबकि मुख्य गेट खुला रखा गया। ग्रहण के चलते मंदिर के कपाट पौने सात बजे खोले जाएंगे, और पूरी शुद्धि के बाद सवा सात बजे आरती होगी। सामान्य दिनों में आरती का समय साढ़े बजे होता है।