शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर को ज्ञापन सौंपते गदर फ्रंट और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि।
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चंबा जिले के भंजराड़ू दंगल मेले में सरकारी प्राइमरी स्कूल तीसा के विद्यार्थियों द्वारा कथित तौर पर अनुसूचित जाति समुदाय के खिलाफ आपत्तिजनक नाटक के मंचन के मामले ने राजनीतिक और सामाजिक तूल पकड़ लिया है। इस मामले को लेकर गदर फ्रंट (हिमाचल प्रदेश) के प्रतिनिधिमंडल ने गुरुवार को शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर से सचिवालय में मुलाकात कर विस्तृत शिकायत पत्र सौंपा।
गदर फ्रंट के अध्यक्ष रवि कुमार दलित ने आरोप लगाया कि 11 जुलाई को आयोजित दंगल मेले में प्रस्तुत नाटक में अनुसूचित जाति समुदाय को कथित रूप से अपमानजनक और जातिवादी तरीके से दर्शाया गया। उन्होंने इसे संविधान की भावना और सामाजिक समरसता के विरुद्ध बताते हुए दोषी शिक्षकों और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की।
दोषियों पर एफआईआर और बर्खास्तगी की मांग
प्रतिनिधिमंडल ने शिकायत में मांग की कि संबंधित प्रधानाचार्य और कथित रूप से जिम्मेदार शिक्षकों को तत्काल निलंबित अथवा बर्खास्त किया जाए तथा उनके खिलाफ अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई की जाए। साथ ही पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने और रिपोर्ट सार्वजनिक करने की भी मांग रखी गई।
हिमाचल प्रदेश राज्य अनुसूचित जाति आयोग ने भी मांगी है रिपोर्ट
शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया कि हिमाचल प्रदेश राज्य अनुसूचित जाति आयोग ने इस मामले का संज्ञान लेते हुए उपायुक्त चंबा से निर्धारित अवधि के भीतर विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है।
शिक्षा मंत्री ने दिए जांच के निर्देश
गदर फ्रंट के अनुसार शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने मामले को गंभीरता से लेते हुए विभागीय जांच के निर्देश दिए हैं और 18 जुलाई तक उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
इस दौरान प्रतिनिधिमंडल में साहिब समिति के उपाध्यक्ष अमित वाल्मीकि, अंबेडकर वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष प्रीतपाल सिंह मट्टू, मदद सेवा ट्रस्ट के संयोजक विकास, सफाई कर्मचारी यूनियन के प्रदेश उपाध्यक्ष अशोक, अधिवक्ता रणवीर, किशोरी लाल सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।