मनोहर हत्याकांड के मुख्य आरोपी और उसके परिवार के खाते में करीब 10 लाख रुपये की राशि मिली है, जबकि तीन बीघा जमीन पर कब्जा पाया गया है। जिला प्रशासन के आदेशानुसार शनिवार को उपमंडल अधिकारी नागरिक सलूणी, कानूनगो और पटवारी ने पुलिस बल के साथ भांदल पंचायत की खदरोगा पहाड़ी पर बनाए मकान के साथ जमीन की पैमाइश की। इसके बाद तीन बीघा जमीन पर उगाई गई सब्जियों की बाड़बंदी को हटाया।
गौर रहे कि हत्याकांड के मुख्य आरोपी के नाम पर 20 बीघा जमीन होने और उसके खातों में लाखों रुपये होने संबंधी जानकारी प्रशासन को मिली है। इसके बाद जिला प्रशासन ने एसडीएम सलूणी, डीएफओ की अगुवाई में टीम गठित कर मौके पर भेजी। टीम ने जमीन की पैमाइश की। हत्यारोपी की एक जगह पांच बीघा और दूसरी जगह दो बीघा जमीन पाई गई। उसने तीन बीघा जमीन पर कब्जा कर सब्जियां उगाई थीं। उपायुक्त चंबा अपूर्व देवगन ने बताया कि आरोपी के खातों की जांच की जा रही है। उसके परिवार के खातों और एफडी को मिलाकर करीब 10 लाख रुपये की राशि मिली है।
खन्ना ने मानवाधिकार आयोग को लिखा पत्र
मनोहर हत्याकांड मामले में भाजपा प्रदेश प्रभारी अविनाश राय खन्ना ने राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष अरुण कुमार मिश्रा को पत्र लिखकर पीड़ित परिवार के लिए मुआवजे की मांग की है। खन्ना ने पत्र में उनका ध्यान जिला चंबा के सलूणी की ओर आकर्षित किया गया। कहा कि चंबा जिले में 21 वर्षीय युवक मनोहर की हत्या कर उसके टुकड़े-टुकड़े किए गए। यह मामला जनता के समक्ष आया है। खन्ना ने कहा कि यह मानव अधिकारों का हनन है। उन्होंने मिश्रा से इस मामले पर संज्ञान लेते हुए उचित कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार से हत्या को अंजाम दिया गया है, यह एक गंभीर विषय है। हिमाचल सरकार को भी इस विषय को गंभीरता से लेना चाहिए।
हत्याकांड में संलिप्त परिवार की पृष्ठभूमि संदिग्ध : भारद्वाज
चंबा-कांगड़ा संसदीय क्षेत्र के प्रभारी राजीव भारद्वाज ने आरोप लगाया कि मनोहर हत्याकांड में विशेष समुदाय के परिवार की संलिप्तता पाई गई है। इस परिवार की पृष्ठभूमि पहले से ही संदिग्ध रही है। कहा कि जिस तरह आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए थी, उसमें पुलिस प्रशासन नाकाम रहा है। इसके चलते कई साक्ष्यों को मिटाने का प्रयास किया गया। लोगों से मिली जानकारी अनुसार मुख्य आरोपी ने सैकड़ों बीघा जमीन पर वर्षों से अवैध कब्जा कर रखा है। इस क्षेत्र में पहले भी कई भेड़पालकों के गायब होने की सूचनाएं समय-समय पर मिलती रही हैं। लेकिन, उन घटनाओं पर भी प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई नहीं की।