हिमाचल में मनरेगा कार्य करवाने में मंडी को पछाड़कर चंबा जिला अव्वल रहा है। चंबा जिले ने मार्च से दिसंबर 2019 तक ही मनरेगा कार्यों पर 98.68 करोड़ खर्च कर दिए हैं, जबकि मंडी जिले ने दिसंबर तक 95.90 करोड़ खर्च किए हैं। बीते वित्तीय वर्ष 2018-19 में प्रदेश में कुल 849 करोड़ के मनरेगा कार्य हुए थे। इस साल यह आंकड़ा नौ माह में 450 करोड़ तक ही पहुंचा है।
बीते वित्तीय वर्ष में मंडी ने 184.42 करोड़ के मनरेगा कार्य करवाए थे और प्रदेश में अव्वल रहा था। कांगड़ा 161.52 करोड़ के कार्यों के साथ दूसरे और 129.42 करोड़ के कार्यों के साथ चंबा तीसरे स्थान पर रहा था। वर्ष 2019-20 के नौ माह में ही चंबा पहले और मंडी दूसरे स्थान पर आ गया है। कांगड़ा 72.84 करोड़ के कार्यों के साथ तीसरे स्थान पर है।
अन्य जिलों में सिरमौर में 32.87 करोड़, बिलासपुर में 13.30, हमीरपुर में 19.17, किन्नौर में 18.84, कुल्लू में 31.08, लाहौल-स्पीति में 2.93, शिमला में 27.44, सोलन में 13.44 और ऊना में 22.61 करोड़ के मनरेगा कार्य मार्च से दिसंबर 2019 तक हो चुके हैं।
उधर, परियोजना अधिकारी एवं उपनिदेशक डीआरडीए हमीरपुर केडीएस कंवर ने कहा कि दिसंबर तक चंबा जिले में मनरेगा कार्यों पर 98.68 करोड़ खर्च किए हैं। बीते वर्ष सबसे ज्यादा मनरेगा कार्यों वाला जिला मंडी इस बार अभी तक 95.90 करोड़ खर्च कर दूसरे स्थान पर है।