शोधकर्ता डॉ. अनिल साव अपने सहयोगियों के साथ
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आईआईटी मंडी के स्कूल ऑफ कम्प्यूटिंग एवं इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अनिल साव ने बताया कि अर्नव भावसर व छात्राओं में सृष्टि गौतम और क्रांति गुप्ता की मदद से यह शोध किया गया है। डिवाइस और एल्गोरिद्म के इंटरनेशनल पेटेंट के लिए आवेदन किए गए हैं। यह कई अंतरराष्ट्रीय जर्नलों में प्रकाशित हुए हैं।
साल 2018 की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में हर साल 74 हजार महिलाओं की मौत सर्वाइकल कैंसर से हो जाती है। वुमंज हेल्थ के जर्नल में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, टेस्ट की उपलब्धता अधिक न होने के कारण देश में मात्र 3.1 प्रतिशत महिलाओं की इस हालत के लिए जांच हो पाती है। कमर, पैर में दर्द महसूस होना, थकान, वजन में कमी, भूख न लगना इसके अन्य लक्षण हैं।
बचाव के तरीके
महिलाओं को नियमित रूप से अपनी जांच करवानी चाहिए। हर तीन साल पर पैप स्मीयर टेस्ट करवाना चाहिए। इसके अलावा एचपीवी वायरस से बचाव के टीके भी लगवाने चाहिए। व्यायाम और पौष्टिक भोजन करना चाहिए।