756 करोड़ की लागत से बन रहे प्रदेश के एकमात्र ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज नेरचौक का शुक्रवार को केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के सचिव शंकर अग्रवाल ने निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज के संचालन को लेकर डेढ़ माह के भीतर निर्णय लिया जाएगा।
शंकर अग्रवाल ने मेडिकल कॉलेज कम अस्पताल के भवन, नर्सिंग कॉलेज बिल्डिंग, लाईब्रेरी सहित अन्य स्थानों का निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज के निरीक्षण की रिपोर्ट केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय में देंगे। 45 दिनों के भीतर फैसला ले लिया जाएगा कि मेडिकल कॉलेज को ईएसआईसी चलाएगी या राज्य सरकार।
साथ ही मेडिकल कॉलेज को निजी क्षेत्र में देने या एम्स में बदलने के विकल्प पर भी विचार किया जाएगा। केंद्रीय सचिव ने कहा कि अभी ईएसआईसी के मात्र तीन हजार से कम कार्ड होल्डर हैं और कॉलेज कम अस्पताल चलाने के लिए प्रत्येक माह दस करोड़ का खर्च होना है। ऐसे में ईएसआईसी विचार कर रही है कि कैसे कार्ड होल्डर बढ़ाए जाएं।
इसमें स्थानीय लोगों, व्यापार मंडल के भी प्रस्ताव हैं। ईएसआईसी के पास इसे एम्स बनाने का प्रस्ताव भी आया है। यहां पर बिल्डिंग, कैंपस और अन्य मूलभूत ढांचा है। एम्स के बारे में भी विचार बन सकता है। इसके लिए स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ विचार विमर्श जा सकता है। अग्रवाल ने बताया कि मंत्रालय कॉलेज पर जल्द से जल्द फैसला लेगा और मेडिकल कॉलेज पर निर्णय 45 दिनों में ले लिया जाएगा।
प्रदेश के एक मात्र मेडिकल कॉलेज कम अस्पताल का निर्माण वर्ष 2009 में शुरू हुआ है। कॉलेज कम अस्पताल में पांच सौ बेड हैं और सौ एमबीबीएस की सीटें हैं। एमबीबीएस के साथ नर्सिंग कॉलेज भी है। कॉलेज कम अस्पताल 2011 से शुरू होना था, लेकिन राजनीति का शिकार होकर रह गया। कॉलेज चलाने से जहां देश और प्रदेश को डाक्टर मिलेंगे। वहीं, प्रदेश के लाहौल स्पीति, कुल्लू, मंडी, बिलासपुर, हमीरपुर के लोगों को स्वास्थ्य सुविधा मिलेगी।
निरीक्षण के दौरान केंद्रीय सचिव के साथ एनबीसीसी के महाप्रबंधक बीआर अरोड़ा, एनसीसी कंपनी के एबी सिंह, ईएसआईसी के रिजनल डायरेक्टर सी नेगी, उपायुक्त संदीप कदम, मेडिकल कालेज नेरचौक की डीन सुरेंद्रा कौर, एसडीएम मंडी मदन कुमार, श्रम अधिकारी अनुराग शर्मा आदि मौजूद थे।