केंद्र सरकार ने मनरेगा में काम करने वाले मजदूरों की दिहाड़ी बढ़ाने से मना कर दिया है। आरडी मंत्रालय ने इसकी फाइल सरकार को लौटा दी है। इसमें कहा गया है कि अभी मनरेगा में दिहाड़ी को नहीं बढ़ाया जा सकता है। वर्तमान में जो दिहाड़ी चल रही है, सरकार को इसी दिहाड़ी से ही पंचायतों में विकास कार्य कराने होंगे।
सरकार की ओर से भेजे गए प्रस्ताव में कहा गया कि पंचायतों में विकास कार्य करने के लिए मजदूर नहीं मिल रहे हैं। इसका कारण दिहाड़ी का कम होना है। ऐसे में मजदूरों का पैसा बढ़ाया जाना आवश्यक हो गया है। केंद्र सरकार ने इस प्रस्ताव पर सहमति नहीं दी है। प्रदेश सरकार मनरेगा में 210 रुपये दिहाड़ी दे रही है।
दिहाड़ीदारों से 10 से पांच बजे तक काम लिया जाता है। केंद्र सरकार मनरेगा में काम करने वाले मजदूरों को 179 रुपये दिहाड़ी दे रही है। आठ घंटे इनसे काम लिया जाता है। हिमाचल में महंगाई के चलते इतने कम पैसे में मजदूरों को काम करना मुश्किल हो रहा है। अधिकांश जिलों में मजदूरों ने काम करने से मना कर दिया है।
पंचायत प्रतिनिधियों को काम करने के लिए मजदूर नहीं मिल रहे हैं। कई पंचायतों में तो ठेके पर मनरेगा के काम हो रहे हैं। प्रदेश सरकार का मानना है कि अगर केंद्र सरकार दिहाड़ी नहीं बढ़ाती है तो पंचायतों के खाते में विकास कार्यों के लिए आया पैसा वापस हो जाएगा।
प्रस्ताव को नहीं मिली मंजूरी: शर्मा
पंचायती राज मंत्री अनिल शर्मा ने कहा कि सरकार की ओर से केंद्रीय आरडी मंत्रालय को दिहाड़ी बढ़ाने का प्रस्ताव भेजा गया था लेकिन मंत्रालय ने दिहाड़ी बढ़ाने के प्रस्ताव को नामंजूर कर दिया है।