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सियासत में अटका हिमाचल का इकलौता केंद्रीय विश्वविद्यालय

Thu, 26 Sep 2019 01:29 PM IST
अरविन्द ठाकुर सीमा शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
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हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय - फोटो : फाइल फोटो
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हिमाचल प्रदेश में केंद्रीय विश्वविद्यालय भाजपा की अंदरूनी राजनीतिक उठा-पटक में अटक गया है। पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार मुख्य कैंपस धर्मशाला में बनवाना चाहते हैं, जबकि केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर इसे अपने संसदीय चुनाव क्षेत्र देहरा ले जाने पर तुले हैं।

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केंद्र सरकार ने 2009 में 13 केंद्रीय विश्वविद्यालयों को मंजूरी दी थी। इनमें 12 बनकर तैयार हो गए हैं, पर हिमाचल विश्वविद्यालय अब तक फाइलों में ही पड़ा है। तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने मुख्य कैंपस धर्मशाला में बनाने के लिए 700 एकड़ जमीन मंजूर की थी।

जबकि देहरा में ऑफ कैंपस बनाने की योजना थी। उसके बाद राज्य में भाजपा सरकार आने के बाद कैंपस धर्मशाला से देहरा ले जाने का प्रयास शुरू हो गया। इसी लड़ाई के चलते पिछले दस सालों में परियोजना की डीपीआर तक नहीं बन पाई।
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अमर उजाला से बातचीत में अनुराग ठाकुर ने कहा कि डीपीआर तैयार है। जल्द ही निर्माण शुरू हो जाएगा। जबकि मानव संसाधन विकास मंत्रालय 23 सितंबर को डीपीआर रिजेक्ट कर चुका है। ठाकुर ने कहा कि देहरा में मुख्य कैंपस और प्रशासनिक कार्यालय धर्मशाला में होंगे।

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पर्यावरण मंत्रालय के पास अटका है प्रस्ताव

राज्य सरकार ने धर्मशाला कैंपस के लिए कुल 681 एकड़ जमीन मंजूर की थी। इसमें से 80 एकड़ सरकारी जमीन मिल चुकी है। जबकि छह सौ एकड़ का प्रस्ताव पिछले साल राज्य सरकार ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की मंजूरी के लिए भेजा गया है। देहरा कैंपस के लिए 300 एकड़ जमीन मिल चुकी है।

विश्वविद्यालय की डीपीआर नए सिरे से तैयार होगी। बृहस्पतिवार को सीपीडब्ल्यूडी के साथ बैठक है। मंत्रालय ने डीपीआर की लागत 500 करोड़ रुपये तक रखने को कहा था, जबकि सीपीडब्ल्यूडी द्वारा तैयार डीपीआर में लागत 1400 करोड़ रुपये बताई थी। ज्यादा लागत के चलते ही पहली डीपीआर नामंजूर हुई थी। - प्रो. कुलदीप अग्निहोत्री, कुलपति, केंद्रीय विश्वविद्यालय धर्मशाला

आंतरिक कलह छात्रों के भविष्य पर भारी
राजनीतिक हस्तक्षेप रोकने को तीन बार केंद्र सरकार को पत्र लिखा, पर कोई रास्ता नहीं निकला। मुख्य कैंपस धर्मशाला या  देहरा में बने, इसका फैसला शिक्षाविदों की कमेटी को करना चाहिए। शिक्षा में राजनीति और अपने जिले का फायदा छोड़कर प्रदेश के छात्रों का भला देखना चाहिए। -शांता कुमार, पूर्व मुख्यमंत्री व वरिष्ठ भाजपा नेता
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