भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) नई दिल्ली के महानिदेशक त्रिलोचन महापात्र ने कृषि विशेषज्ञों एवं वैज्ञानिकों से आह्वान किया कि वे आलू उत्पादन की लागत घटाने को किसानों की सहायता करें। देश के सभी क्षेत्रों में वैज्ञानिक प्रयोगों के बाद आलू उत्पादन को समान रूप से बढ़ाने की भी मांग उठाई। वह वीरवार को केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान (सीपीआरआई) के 68वें स्थापना दिवस पर बोल रहे थे। उन्होंने ऐसे समारोहों में किसानों की अधिक भागीदारी बढ़ाने को भी कहा।
कृषि एवं बागवानी आयुक्त एके मल्होत्रा ने एरोपोनिक तकनीक से बीज आलू तैयार करने और इसका अधिक उत्पादन होने के लिए सीपीआरआई विशेषज्ञों की पीठ थपथपाई। कहा कि आज ऐसी किस्में भी तैयार किए जाने की जरूरत है, जिनमें सूक्ष्म पोषक तत्वों को ग्रहण करने की अधिक क्षमता हो।
देश में आलू उत्पादन में आठ मीट्रिक टन से 25 मीट्रिक टन तक प्रति हेक्टेयर उत्पादन के अंतर को भी कम करने की बात की। आलू की उत्पादन लागत घटाने को विभिन्न विधियों को ईजाद करने पर बल दिया। उपमहानिदेशक बागवानी डा. एके सिंह, परिषद के सहायक उपमहानिदेशक डा. टी जानकीराम, शिमला नगर निगम के महापौर संजय चौहान, डा. पीएम गोविंदाकृष्णन समेत कई अन्य ने भी विचार रखे।
संस्थान के निदेशक डा. एसके चक्रवर्ती ने अतिथियों का स्वागत किया। पंजाब से आए आलू उत्पादकों ने भी एरोपोनिक तकनीक से आलू उगाने के अनुभव साझा किए। संस्थान की स्मारिका और अन्य पत्रों का लोकार्पण भी किया गया। किसानों को ऑनलाइन जानकारी देने को स्मार्ट पोटेटो पोर्टल को लोकार्पित किया गया।
महिला किसान उमा चंदेल सम्मानित, कई विशेषज्ञ पुरस्कृत
शिमला जिले के ठियोग से प्रगतिशील महिला किसान उमा चंदेल को बास्केट से सम्मानित किया गया। वैज्ञानिक वर्ग में डा. देवेंद्र गुप्ता और डा. विजय किशोर गुप्ता को नवाजा गया। तकनीकी वर्ग में यशपाल शर्मा, योगेश गुप्ता और सुमिता शर्मा सम्मानित हुईं। प्रशासनिक कैटेगरी में डा. पीएम गोविंदाकृष्णन, एडी शर्मा और जयराम ठाकुर को सम्मानित किया गया। सहयोगी श्रेणी में अमरनाथ और मंजीत सम्मानित हुए।
संस्थान का एस. रामानुजम अवार्ड डा. विनोद कुमार, डा. विनय भारद्वाज, डा. एसके लूथरा, डा. राजकुमार और अन्य को दिया गया। पूर्व निदेशक डा. बीरपाल भी सम्मानित हुए। दयानंद पब्लिक स्कूल शिमला के 60 छात्र-छात्राओं और शिमला के कई किसानों ने भी इस समारोह में हिस्सा लिया।