केंद्र सरकार ने वक्त पर सीए रिपोर्ट न मिलने की वजह से हिमाचल को मिलने वाली महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) की किस्त रोक दी है। रिपोर्ट भेजने में देरी की वजह से सूबे के लाखों दिहाड़ीदारों को चार महीने से पैसे नहीं मिले हैं, जबकि मनरेगा में मजदूरी का भुगतान 15 दिन के भीतर करना होता है। मौजूदा समय में पंचायतों के विकास कार्यों को उधारी से अंजाम दिया जा रहा है।
मनरेगा के तहत प्रदेश भर में करीब 105 करोड़ बकाया है। बता दें कि मनरेगा में वर्ष 2016-17 में अब तक 4,33,611 मजदूरों ने काम किया है और जनवरी में भी 1,81,455 मजदूर काम कर रहे हैं। ग्रामीण विकास विभाग के उपनिदेशक (मनरेगा) बीडी शर्मा ने बताया कि प्रदेश सरकार ने सीए रिपोर्ट केंद्र को भेज दी है और एक सप्ताह के भीतर फंड रिलीज हो जाएगा। उन्होंने बताया कि जल्द ही मजदूरी का भुगतान कर दिया जाएगा।
किस जिले में कितना बकाया
मंडी 2394.34
चंबा 1875.9
कांगड़ा 1936.73
सिरमौर 770.66
शिमला 734.68
कुल्लू 724.8
हमीरपुर 626.46
ऊना 509.81
बिलासपुर 545.87
सोलन 253.36
किन्नौर 136.37
लाहौल-स्पीति 69.18
(राशि लाख रुपये में)
इसलिए जारी नहीं किया फंड
मनरेगा में फंड लेने के लिए गत वर्ष की सीए रिपोर्ट प्रदेश सरकार केंद्र सरकार को भेजती है और उसके आधार पर केंद्र अगली किस्त जारी करता है। इस बार प्रदेश सरकार ने यह रिपोर्ट समय पर केंद्र को नहीं भेजी, जिसका खामियाजा प्रदेश के लाखों मनरेगा मजदूरों का भुगतना पड़ रहा है।