सूबे के सरकारी स्कूलों की खस्ताहाल पेयजल व्यवस्था पर केंद्र सरकार ने सख्ती शुरू कर दी है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने प्रदेश सरकार से स्कूलों की पेयजल व्यवस्था की स्टेटस रिपोर्ट तलब की है। केंद्र की सख्ती के बाद सरकार ने आननफानन में पेयजल व्यवस्था दुरुस्त करने की कवायद शुरू कर दी है।
राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान (आरएमएसए) के तहत मानव संसाधन विकास मंत्रालय हर साल राज्य सरकारों को स्कूलों की मूलभूत सुविधाओं के लिए करोड़ों रुपये देता है। अब केंद्र सरकार ने सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधारने के लिए सख्ती शुरू कर दी है। आरएमएसए निदेशक ने हिमाचल सरकार को पत्र लिखकर राज्य के स्कूलों की खराब पेयजल व्यवस्था पर नाराजगी जताई है।
स्कूलों में पीने के पानी की व्यवस्था से संबंधित रिपोर्ट भी तलब की है। अतिरिक्त मुख्य सचिव शिक्षा पीसी धीमान ने भी आरएमएसए से जानकारी मांगे जाने की पुष्टि की है। केंद्र के इस सख्त रवैये के बाद प्रदेश के शिक्षा विभाग के अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए हैं। आला अधिकारियों ने निचले अधिकारियों को पत्र लिखकर सात दिन के अंदर संबंधित जानकारी मांगी है।
विभागीय सूत्रों की मानें तो पिछले कुछ समय में हिमाचल के कई जिलों में करीब पांच दर्जन से ज्यादा स्कूलों में पीने के पानी की व्यवस्था न होने की बात सामने आई है। इसी जानकारी के आधार पर पहले केंद्र ने नाराजगी जताई और अब रिपोर्ट तलब की है।
एक हफ्ते में सौंपनी है स्टेटस रिपोर्ट
पीने के पानी की स्थिति बताने को लेकर केंद्र ने राज्य सरकार को एक हफ्ते का समय दिया है। खास बात यह है कि पेयजल व्यवस्था से संबंधित जानकारी को एक तय प्रोफार्मा में ही केंद्र को उपलब्ध कराना है। ऐसे में शिक्षा विभाग के अधिकारी दिन रात स्टेटस रिपोर्ट तैयार करने में जुटे हैं।