मजदूर यूनियन सीटू के प्रदेश अध्यक्ष विजेंद्र मेहरा ने बजट को कर्मचारी और मजदूर विरोधी बताया है। उन्होेंने कहा कि सरकार की पूंजीपतियों और उद्योगपतियों से सीधी मिलीभगत है। परिणाम स्वरूप पूरे सार्वजनिक क्षेत्र को बेचने के दरवाजे इस बजट और इससे पहले जारी किए गए आर्थिक सर्वेक्षण ने खोल दिए हैं।
रेलवे में 150 निजी रेलें चलाना, एलआईसी और एयर इंडिया को बेचना, बीएसएनएल में 90 हजार कर्मचारियों को वीआरएस के लिए मजबूर करना, बैंकों का विलय कर 13 हजार शाखाओं को बंद करना और लाखों कर्मचारियों को नौकरी से निकालने का काम कर उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने के लिए किया गया है।
कॉरपोरेट टैक्स को मोदी सरकार ने वर्ष 2014 की तुलना में लगभग आधा करके नए उद्योगों को प्रोत्साहित करने के नाम पर 15 प्रतिशत करके उन्हें लाखों करोड़ रुपये का फायदा दिया है, जबकि सातवें वेतन आयोग व 15वें भारतीय श्रम सम्मेलन की सिफारिशों पर मजदूरों के वेतन को 21 हजार रुपये करने की मांग को सरकार ने खारिज कर दिया है।
शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज ने कहा है कि देश का वर्तमान अंतरिम बजट प्रत्येक वर्ग के लिए राहत ले कर आया है। किसानों और संगठित क्षेत्र के मजदूरों के लिए आय के स्रोत बढ़ाने का निर्णय स्वागत योग्य है। सरकार ने असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को पेंशन का प्रावधान कर महत्वपूर्ण निर्णय लिया है।
वेतनभोगी कर्मचारियों को इनकम टैक्स में बड़ी राहत देना एक और संतोषजनक निर्णय है। शिक्षा मंत्री ने कहा कि मोदी सरकार का बजट देश को नई दिशा देने वाला है। उन्होंने शिक्षा क्षेत्र में 99300 करोड़ खर्च करने के लिए केंद्रीय नेतृत्व का धन्यवाद किया।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर ने कहा कि केंद्रीय बजट में कुछ भी नया नहीं है। बजट पूरी तरह दिशाहीन है। महज आंकड़ों को दर्शाते हुए बजट में केवल निजीकरण को प्रोत्साहन देने और सरकारी उपक्रमों को निजी हाथों में देने के स्पष्ट संकेत हैं। देश की अर्थव्यवस्था के सुधार के कोई कारगर उपाय बजट में नहीं हैं। रोजगार पर बजट खामोश है।
हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्यों के विकास को भी पूरी तरह दरकिनार किया है। राठौर ने कहा कि हिमाचल को इस बजट से घोर निराशा हाथ लगी है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और वित्त राज्य मंत्री जो प्रदेश से ताल्लुक रखते है, ऐसे में केंद्रीय बजट से प्रदेश के लोगों की उम्मीदें धरी की धरी रह गईं हैं। हिमाचल को रेलवे में कुछ नहीं मिला है। न ही वायु सेवा के विस्तार को मिला है।
पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में दूसरी बार बनी सरकार का यह पहला पूर्ण बजट आया है। इसमें समाज के प्रत्येक वर्ग के हितों का ध्यान रखा गया है। यह सर्व-स्पर्शी और राहत पहुंचाने वाला बजट है। जिसके लिए प्रधानमंत्री, वित्तमंत्री और सारी सरकार बधाई की पात्र है।
बजट में किसानों के लिए 16 सूत्री फॉर्मूले की घोषणा से ग्रामीण क्षेत्र की आर्थिकी में क्रांतिकारी परिवर्तन आयेगा। हिमाचल जैसे राज्य के लिए और भी प्रसन्नता की बात है कि बागवानी को कृषि से भी ज्यादा महत्वपूर्ण माना गया है। बीस लाख किसानों को सिंचाई के लिए सोलर पंप लगाने का प्रावधान सराहनीय है। आयकर के विभिन्न स्तरों पर राहत देकर प्रत्येक वर्ग को लाभ पहुंचाया गया है।
केंद्र सरकार की ओर पेश किए गए बजट की भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार ने सराहना की है। शांता ने केंद्रीय बजट को गरीब और किसान के हित में बताया है। इस बजट में सबसे खास बात यह है कि मोदी सरकार ने किसानों के लिए अलग से बजट का प्रावधान किया है। इससे आने वाले दिनों में किसानों की आर्थिकी बढ़ेगी, जिससे किसान खुशहाल होगा।
साथ ही बागवानों को भी लाभ होगा। गांवों में रोजगार बढ़ेगा। पांच लाख तक कमाने वाले को टैक्स की सूची में नहीं आने से इससे छोटे व्यापारी से लेकर मध्यम वर्ग के लोगों को बहुत लाभ होगा। इससे आने वाले दिनों में जीडीपी में सुधार आएगा। जबकि, यह बजट गरीब से लेकर अमीर तक सबके हित में है।
पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह
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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने केंद्रीय बजट पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि इससे देश की अर्थव्यवस्था सुधरने वाली नहीं। एक बार जब अर्थतंत्र पटरी से बाहर हो जाए तो उसे पटरी पर लाने के लिए एक अर्थशास्त्र का ज्ञान होना बहुत ही आवश्यक है। इसलिए यह बजट पूरी तरह दिशाहीन है।
उन्हें नहीं लगता कि इस सरकार से देश की अर्थव्यवस्था सुधरेगी। बजट में भी ऐसा कुछ नहीं है। देश बेरोजगारी और महंगाई की मार झेल रहा है। औद्योगिक विकास ठप पड़ा है। छोटे उद्योग मंदी के कारण बंद पड़ गए है। उन्हें पुनर्जीवित करने के कोई उपाय बजट में नहीं हैं। हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्यों के विकास को भी कोई प्रोत्साहन नहीं है।
केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट मामले राज्य मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि शनिवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने नई अर्थव्यवस्था का नया बजट और नए भारत को समर्पित बजट पेश किया है। इस सर्वजनहितकारी बजट के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण समेत सभी देशवासियों को बधाई दी है। उन्होंने शनिवार को जारी बयान में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास की नीति का अनुसरण करते हुए बजट पेश हुआ है।
वर्ष 2017 में टीबी हारेगा, देश जीतेगा नारे के साथ जनजागरूकता लाने के लिए धर्मशाला में सांसदों और बॉलीवुड के प्रतिनिधियों के बीच एक क्रिकेट मैच और वर्ष 2019 में दिल्ली में शिखर सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री, सांसदों, विधायकों और नीति विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। अब 2025 तक देश को टीबी मुक्त बनाने का एलान किया गया है। बैंकिंग और आय कर में जनता की अपेक्षाओं अनुसार हमने बैंक में पैसा जमा कराने वालों के लिए गारंटी 1 लाख से पांच लाख रुपये तक बढ़ाने, 5 लाख की सालाना आय पर कोई टैक्स नहीं लेने और आम लोगों के विभिन्न वर्गों के लिए टैक्स घटाया है।
नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ने कहा है कि मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर बीते 10 दिन से दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर प्रदेशवासियों को बताएं कि केंद्रीय बजट में हिमाचल को क्या हासिल हुआ। केंद्र का बजट पूरी तरह फ्लॉप साबित हुआ है और विकास दर में कोई सुधार नहीं होगा। हिमाचल प्रदेश को इससे कोई फायदा नहीं होगा। बेरोजगारी और महंगाई बढ़ेगी। मुकेश ने शनिवार को जारी बयान में कहा कि बजट ने हिमाचल को निराश किया है।
हिमाचल के लिए कोई भी प्रोजेक्ट नहीं दिया गया। बजट में बेरोजगारों से धोखा हुआ और नौकरियों का कोई प्रावधान नहीं है। अर्थव्यवस्था को सुधारने की कोई गुंजाइश नहीं है। तीसरे साल भी हिमाचल के राजमार्गों का निर्माण शुरू नहीं होगा। कहा कि केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर भी वित्त मंत्रालय में बैठकर हिमाचल के हितों की पैरवी नहीं कर पाए। अनुराग ठाकुर दिल्ली चुनावों के विवादों में फंसे रहे और बजट निकल गया।