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पुलों की डीपीआर पर केंद्र की हिदायत- ग्रामीण सड़कों पर बन रहे पुलों को ठीक से बनाओ

Tue, 09 Oct 2018 01:09 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
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प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के तहत प्रदेश में बन रहे पुलों की डीपीआर पर केंद्र सख्त हो गया है। केंद्र की ओर से हिमाचल सरकार को पत्र भेजकर पुलों को ठीक तरह से बनाने की हिदायत दी गई है। कहा गया है कि गलत तरीके से बनाए गए पुल भारी बारिश और बाढ़ के पानी को नहीं झेल पा रहे हैं। केंद्र ने तकनीकी पैरामीटर के आधार पर पुलों की विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) बनाने के लिए राज्य सरकार को फरमान जारी किए हैं।

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केंद्र ने पीएमजीएसवाई के तहत बन रहे उन ऊंचे पुलों पर कड़ी आपत्ति जताई है, जो निर्माण के दौरान ही फेल रहे।  केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय की राष्ट्रीय ग्रामीण सड़क विकास एजेंसी के निदेशक उत्तम कुमार ने हिमाचल समेत अन्य राज्यों के एसआरआरजीए के मुख्य अभियंताओं को पत्र जारी किए हैं। कहा गया है कि ऊंचाई पर बनने वाले पुल फेल हो रहे हैं या फिर निर्माण के दौरान कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

ये चुनौतियां निमभन स्तरीय डीपीआर तैयार करने के कारण सामने आई हैं और पुल तकनीकी रूप से डिजाइन भी नहीं पाए गए। पुल का हाइड्रोलिक डिजाइन भी वास्तविक बाढ़ डाटा और कैचमेंट डाटा के आधार पर नहीं है। जीओ डाटा भी जियोलाजिकल डाटा के आधार पर तैयार नहीं किया गया। पुल निर्माण के दौरान भी पुलों के डिजाइन पर गौर नहीं किया जा रहा है। 
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अब टीम करेगी गुणवत्ता की जांच
प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत बनने वाले पुलों के निर्माण के बाद गुणवत्ता को जांचने के लिए चीफ इंजीनियर, अधीक्षण अभियंता और एसटीए की साझी टीम को निरीक्षण करना अनिवार्य किया गया है। नए प्रस्तावों को तैयार करते समय इस दिशा में सख्ती से अमल करने को कहा गया है। 

हाइड्रोलिक डाटा तैयार करने में भी कोताही 
हाल ही में भारी बरसात और बाढ़ में पुलों के बहने से यह बात सामने आई है। पत्र में अन्य घटनाओं का हवाला देकर कहा गया है कि केंद्र के ध्यान में यह मामला भी आया है कि पुलों के निर्माण के दौरान हाइड्रोलिक डाटा तैयार करने में भी कोताही की गई है।

पुलों की ड्राइंग के आधार पर ढांचा तैयार नहीं किया जा रहा और भूमि की वास्तविक स्थिति को ध्यान में नहीं रखा जाता। कई जगह पुल के एक छोर से दूसरे छोर तक डैक स्लैब में दो मीटर तक अंतर पाया गया है। ऐसे मामले सामने आने से इंजीनियरों की छवि पर विपरीत असर पड़ रहा है।

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