केंद्र ने हिमाचल सरकार को मनरेगा फंड के उपयोग के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। कहा है कि मंजूर प्लान से बाहर जाकर राशि खर्च की गई तो मनरेगा की अगला बजट रोक दिया जाएगा। सरकार को मनरेगा के तहत खर्च राशि की उपयोगिता प्रमाणपत्र वित्तीय वर्ष के 12 माह में प्रस्तुत करना होगा। कामगारों को धनराशि का भुगतान भी समय पर करना होगा।
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय के निदेशक (मनरेगा) राघवेद्र प्रताप सिंह ने प्रदेश के प्रधान सचिव वित्त, प्रधान सचिव ग्रामीण विकास विभाग और हिमाचल के रेजीडेंट कमिश्नर को पत्र भेजा है। इसमें कहा है कि वित्तीय वर्ष 2018-19 के लिए मनरेगा की विभिन्न गतिविधियों को जारी राशि संबंधित कार्य पर ही खर्ची जाए, जिसे प्लान में रखकर मंजूर कराया गया हो।
राज्य स्तर पर इलेक्ट्रानिक फंड मैनेजमेंट सिस्टम (ईएफएमएस) का हिसाब-किताब रखना होगा। केंद्र से आए फंड को राज्य सरकार को सीधे संबंधित क्षेत्रों के खाते में भेजना होगा। फंड जारी करने को कोई अन्य खाता नहीं रखना होगा। ये खाते मनरेगा काम के लिए ब्लॉक और पंचायत स्तर पर खुले होने चाहिए।
केंद्र सरकार से स्पष्ट किया है कि मनरेगा कार्य के सभी खर्चों के संबंधित वाउचर आधार पर डाटा केंद्र को भेजना होगा। जिला स्तर पर कुशल, अर्द्ध कुशल कामगारों और सामग्री का खर्च 40 फीसदी से अधिक नहीं होना चाहिए। मनरेगा कार्यों के लिए सामग्री और लेबर खर्च केंद्र और राज्य सरकार 75:25 के अनुपात में वहन करेंगे।
स्कीम के तहत खर्च राशि का उपयोगिता प्रमाण पत्र लंबित नहीं होना चाहिए। प्रशासनिक खर्चों के लिए जारी राशि मनरेगा कार्यों की सामग्री के लिए खर्च नहीं की जा सकती। केंद्र से मनरेगा के लिए जारी राशि का बाकायदा ऑडिट महालेखाकार कार्यालय करेगा।