राजधानी शिमला के बाद अब हिमाचल के 10 जिलों की 38 तहसीलों में उत्पाती बंदरों को मारने की इजाजत मिल गई है। प्रदेश सरकार की मांग पर केंद्र ने बंदरों (रिसेस मंकी) को एक वर्ष की अवधि के लिए वर्मिन घोषित कर दिया है। शुक्रवार को इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी गई है। हालांकि, यह अधिसूचना प्रदेश के वन क्षेत्रों के लिए लागू नहीं होगी।
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केंद्र की अधिसूचना के बावजूद प्रदेश में बंदरों को मारना आसान नहीं होगा, क्योंकि बंदरों को मारने की इजाजत से संबंधित एक मामला हिमाचल हाईकोर्ट में लंबित है। प्रदेश के वन मंत्री ठाकुर सिंह भरमौरी ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के उच्चाधिकारियों के साथ बैठक कर बंदरों से निजात दिलाने पर चर्चा की थी। इस दौरान वन निगम के उपाध्यक्ष केवल सिंह पठानिया भी मौजूद रहे।
बैठक के बाद ही केंद्र सरकार ने बंदरों को वर्मिन घोषित करने की अधिसूचना जारी कर दी है। भरमौरी ने बताया कि प्रदेश सरकार की ओर से राज्य के वन क्षेत्रों के बाहर बंदरों की ओर से बड़े पैमाने पर खेती और बागवानी के अलावा आम लोगों और संपत्ति को पहुंचे रहे नुकसान की रिपोर्ट केंद्र सरकार के समक्ष रखी। इसी रिपोर्ट के आधार पर बंदरों को वर्मिन घोषित करने की मांग की गई थी।
राजधानी शिमला में पहले ही बंदरों को वर्मिन घोषित किया जा चुका है।
प्रदेश की 38 तहसीलों में चंबा जिले की डलहौजी, भटियात, सिहुंता, चंबा, कांगड़ा की नूरपुर, इंदौरा, फतेहपुर, जवाली, कांगड़ा, पालमपुर तथा बड़ोह, ऊना जिले की भरवाईं, अंब, ऊना, हरोली और बंगाणा, बिलासपुर जिले की घुमारवीं, नयनादेवी, बिलासपुर सदर और नम्होल, शिमला जिले की शिमला ग्रामीण, रामपुर तथा नेरवा, सिरमौर जिले की पच्छाद, राजगढ़, रेणुका, शिलाई तथा कमरऊ, कुल्लू जिले की तहसील मनाली, कुल्लू और सैंज, हमीरपुर जिले की बड़सर और बिझड़ी, सोलन जिले की नालागढ़, कसौली, सोलन और दाड़लाघाट तथा मंडी जिले की सुंदरनगर तहसील शामिल है।
शिमला में पहले ही वर्मिन घोषित हैं बंदर
राजधानी शिमला में पहले ही बंदरों को वर्मिन घोषित किया जा चुका है। हालांकि, बंदरों को वर्मिन घोषित करने के बावजूद अभी तक एक भी बंदर को मारा नहीं जा सका है। बंदरों को मारने की इजाजत देने का मामला हिमाचल हाईकोर्ट में लंबित है।