ट्रक ऑपरेटरों व कंपनी प्रतिनिधियों के बीच बैठक।
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सीमेंट उद्योग अल्ट्राटेक प्रबंधन द्वारा कम किए गए सीमेंट ढुलाई के किराये के समाधान के लिए तीन घंटे तक चली बैठक विफल रही। इसके बाद अल्ट्राटेक में माल ढुलाई करने वाली सभी परिवहन सभाओं में खासा रोष है। ऑपरेटरों ने चेताया है कि अगर आगामी दो दिन में उनकी मांगों को नहीं माना तो ऑपरेटर कठोर फैसला लेने को मजबूर होंगे। इसकी सारी जिम्मेदारी प्रशासन और अल्ट्राटेक प्रबंधन की होगी। यह बैठक कंपनी प्रबंधन, प्रशासन और अल्ट्राटेक समन्वय समिति के बीच हुई। लेकिन इस बैठक में ऑपरेटरों के किसी भी मुद्दे पर मुहर नहीं लगी। कारण यह रहा कि जो अधिकारी कंपनी की ओर से बैठक में पहुंचे थे वो कोई भी फैसला लेने के लिए अधिकृत नहीं थे। बैठक में कम किए किराये के फैसले को वापस लेना अहम मुद्दा था।
वहीं ऑपरेटरों की अन्य 13 मांगों जो पहले से ही उन्होंने कंपनी प्रबंधन के समक्ष रखी है उनपर भी चर्चा हुई। बैठक में अल्ट्राटेक की ओर से संपर्क महाप्रबंधक प्रदीप आहलूवालिया, एसडीएम अर्की केशवराम, समन्वय समिति की ओर से सलाहकार दौलत सिंह ठाकुर, कैप्टन भगत राम, सुरजीत सेन, सुरेंद्र वर्मा, लालमन, बलदेव मौजूद रहे। कंपनी की ओर से कोई अधिकृत अधिकारी नहीं पहुंच पाया जो मौके पर कोई फैसला ले सके। ऑपरेटरों ने आरोप लगाया कि कंपनी मुद्दे को सुलझाना नहीं चाहती है। इसी कारण मौके पर अधिकृत अधिकारियों को नहीं भेजा। एसडीएम केशव राम ने मौके पर कहा कि जो भी बैठक में कार्रवाई हुई, इसकी रिपोर्ट डीसी सोलन को भेजी जाएगी। ताकि वो इस मसले पर आगामी कार्रवाई कर सके।
समन्वय समिति के सलाहकार दौलत सिंह ठाकुर ने कहा कि ऑपरेटरों में किराये कम होने के बाद से लगातार रोष है। कंपनी प्रबंधन ने उन्हें आश्वासन दिया था कि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई होगी। लेकिन हर बैठक बेनतीजा हो रही है। चेताया कि अगर अगले दो दिन में उनकी मांगे पूरी नहीं हुई तो दो दिन बाद ऑपरेटर बैठक करेंगे और कठोर निर्णय लेने को मजबूर होंगे। बताते चलें कि अदाणी समूह द्वारा अंबुजा और एसीसी सीमेंट उद्योग में किराया कम करने के बाद अल्ट्राटेक प्रबंधन ने भी किराये में कटौती की थी, इसकी अधिसूचना उन्होंने 25 फरवरी को जारी की थी। इसके बाद से ऑपरेटरों में रोष जारी है। ऑपरेटरों का कहना है कि अल्ट्राटेक में अदाणी मॉडल को फॉलो नहीं किया जा सकता है। क्योंकि यहां की भौगोलिक परिस्थितियां अलग है। लेकिन कंपनी प्रबंधन ने ऑपरेटरों की कोई बात नहीं सुनी है।