इसे चिराग तले अंधेरा कहा जा सकता है! सीमेंट के बड़े ब्रांड सूबे में अपना माल तैयार कर देश भर को सप्लाई करते हैं। प्रदेश से अन्य राज्यों तक पहुंचने वाले सीमेंट पर कई तरह के शुल्क लगते हैं। लेकिन इन अतिरिक्त शुल्कों के बावजूद हिमाचल में सीमेंट के दाम देश के अन्य राज्यों के मुकाबले सबसे ज्यादा हैं।
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यह हाल तब है जब दशकों से सीमेंट के दाम चुनावी मुद्दा बनते रहे हैं। वर्ष 1984 में सबसे पहला सीमेंट प्लांट स्थापित हुआ जिसके बाद हिमाचल के सीमावर्ती जिला सोलन और बिलासपुर सीमेंट हब में तब्दील हो गए।
दशकों से हिमाचल प्रदेश में हो रहे सीमेंट निर्माण से सस्ती दरों पर तो सीमेंट नहीं मिल पाया है, उल्टा स्थानीय लोगों को विस्थापन, प्रदूषण, माइनिंग से घरों को खतरे जैसी कई दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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कांग्रेस और भाजपा दोनों ने ही लोगों को दिखाए सब्जबाग
प्रदेश में चुनाव के दौरान सस्ती दरों पर सीमेंट का मुद्दा उठता रहा है। कांग्रेस और भाजपा दोनों ने ही हिमाचल में सीमेंट के दाम करने के सब्जबाग लोगों को दिखाए, लेकिन किसी भी दल ने सत्ता में आने के बाद इस तरफ रुचि नहीं दिखाई।
लोगों से वोट लेने के लिए वादों का यह सिलसिला सालों से चल रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर सच्चाई यह है कि आज भी हिमाचल में सीमेंट महंगा है। पंजाब और हरियाणा में सीमेंट के जो दाम हैं, उनका हिमाचल में रात-दिन का फर्क है।
वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में भी इस क्रम को दोहराया गया। वर्तमान सदर विधायक ने पिछले चुनाव में जनता से 165 रुपये प्रति सीमेंट बोरी की दर से मूल्य तय करवाने का वादा किया था।
लेकिन दाम आज तक कम नहीं हो पाए हैं। स्थानीय लोगों को पंजाब से भी अधिक कीमत चुका कर सीमेंट खरीदना पड़ रहा है।
अपने कार्यकाल में नहीं बढ़ने दिए दाम: बंबर ठाकुर
सदर के विधायक बंबर ठाकुर का कहना है कि उन्होंने अपने कार्यकाल में सीमेंट के दाम नहीं बढ़ने दिए। 20 से 25 रूपये तक रेट कम भी किए गए हैं।
विधायक बताएं कहा गया उनका वादा: सुरेश चंदेल
पूर्व भाजपा सांसद सुरेश चंदेल का कहना है कि कांग्रेस के विधायक ने 2012 के चुनाव के समय लोगों से 165 रूपये में सीमेंट की बोरी दिलाने का वादा किया था। उन्हें बताना चाहिए कि आखिर उनके चुनावी वादे का क्या हुआ।
3000 ट्रक सीमेंट की रोजाना सप्लाई
सूबे में एसीसी, अंबुजा और अल्ट्राटेक के सीमेंट प्लांट चल रहे हैं। तीनों ब्रांडों की निर्माण और सप्लाई की क्षमता का पैमाना इसी बात से लगाया जा सकता है कि हिमाचल से रोजाना करीब तीन हजार ट्रक सीमेंट बाहरी राज्यों को भेजे जाते हैं।
निर्माण स्थल होने के चलते कायदे से हिमाचल में सीमेंट सस्ता होना चाहिए, जबकि ऐसा दशकों बाद भी संभव नहीं हो पाया है।
हिमाचल में सीमेंट के दाम कम करवाने के लिए उद्योगों से पहले भी बातचीत की गई है। अन्य राज्यों और हिमाचल के मूल्यों का अंतर दूर करने के लिए भविष्य में फिर बात की जाएगी। प्रदेश की जनता को सस्ती दरों से सीमेंट दिलाने के लिए सरकार संकल्पबद्ध है। -मुकेश अग्निहोत्री, उद्योग मंत्री
सीमेंट रेट
सीमेंट हिमाचल पंजाब हरियाणा
एसीसी सुरक्षा 355 335 325-330
एसीसी गोल्ड 405 375 365
अल्ट्राटेक 355-360 325-320 310-325
अंबुजा सीमेंट 360 325 310-335
सीमेंट हिमाचल में तैयार होता है और सस्ती दरों पर बिक्री दूसरे राज्यों में होती है। ऐसी व्यवस्था तो लोगों से धोखा है। विधायक महोदय ने निजी स्वार्थों की खातिर सीमेंट दाम के मसले पर चुप्पी साध ली है। उन्हें लोगाें को जवाब देना चाहिए। -केडी लखनपाल, अध्यक्ष, सेवा निवृत कर्मचारी कल्याण एवं विकास मंच
हिमाचल से पंजाब तक सीमेंट पहुंचाने पर प्रति ट्रक 10 हजार रुपये का अतिरिक्त खर्च उठाने पर भी सीमेंट कंपनियां हिमाचल को महंगा और बाहरी राज्यों को सस्ता सीमेंट दे रही हैं। सरकारों ने इस गड़बड़झाले को दूर करने के लिए कोई कदम नहीं उठाया। सीमेंट निर्माण की सारी कीमत स्थानीय लोग चुका रहे हैं और फायदा दूसरों को दिया जा रहा है। -दौलत सिंह ठाकुर, महासचिव खारसी सभा
सीमेंट उद्योगों के लिए लोगों ने अपनी जमीनें दी हैं। लेकिन अब यही उद्योग सुविधा के बजाय लोगों के लिए मुसीबत बन गए हैं। ब्लास्टिंग और माइनिंग से लोगों का जीना मुहाल है। सीमेंट की उड़ती धूल से सांस लेना मुश्किल है। इस पर भी यदि लोगों को सीमेंट महंगी दरों पर मिले तो यह ज्यादती है। सरकारों ने भी इस मसले पर कभी कोई राहत नहीं दिलाई। -कैप्टन बालक राम शर्मा, अध्यक्ष, हिमाचल प्रदेश भूतपूर्व सैनिक कल्याण एवं विकास समिति