हिमाचल प्रदेश के 10 जिलों में सीसीटीवी कैमरा और ड्रोन से अवैध खनन पर निगरानी के प्रयोग विफल हो गए हैं। राज्य सरकार ने अवैध खनन करने वालों पर नकेल कसने के लिए कदम उठाए थे। प्रायोगिक तौर पर ही निगरानी की व्यवस्था चरमरा गई है।
राज्य के कई हिस्सों में अवैध खनन के मामले सरकार के सामने आते रहे हैं और कई बार लोगों को रंगे हाथों भी पकड़ा जा चुका है। वर्तमान सरकार ने 156 ब्लॉकों की नीलामी खनन के लिए की हैं। इसके अलावा सौ और ब्लाकों की नीलामी करने की तैयारी की जा रही है।
सरकारी खजाने को आर्थिक क्षति से बचाने के लिए सरकार ने विभिन्न खानों में सीसीटीवी कैमरे लगाना अनिवार्य कर दिया था। इतना ही नहीं सरकार ने खनन पट्टे देने से पहले यह शर्त शामिल कर दी थी कि मौके पर सीसीटीवी कैमरा अनिवार्य होंगे।
इसके बाद से पट्टा धारकों ने मौके पर सीसीटीवी कैमरा भी लगाए। वहां से कैमरा तोड़ने और इनकी चोरी होने की शिकायतें आने लगीं। सीसीटीवी कैमरा के बदले सरकार ने ड्रोन कैमरा से अवैध खनन पर निगरानी का प्रयोग भी किया।
ड्रोन से बद्दी में हो रहे खनन पर नजर रखी गई लेकिन यह व्यवस्था भी ठंडी पड़ गई है। राज्य जियोलॉजिस्ट पुनीत गुलेरिया ने कहा कि अवैध खनन को रोकने के लिए सीसीटीवी लगाने अनिवार्य किए थे। कैमरा चोरी होने और इन्हें तोड़ने के मामले सामने आ रहे थे।
इसके बाद बद्दी में ड्रोन से निगरानी करने का प्रयोग किया परंतु इससे लंबे समय तक निगरानी नहीं हो पा रही। ड्रोन की बैटरी कम चलती है और कवरेज कम हो रही है। अब सरकार से विभाग में उपमंडल स्तर पर फील्ड स्टाफ भरने का मामला उठाया जा रहा है।