वर्ष 2026-27 से राज्य के 200 सरकारी स्कूलों में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) आधारित पाठ्यक्रम शुरू किया जाना है। नई व्यवस्था लागू करने के लिए निदेशालय ने रोडमैप तैयार कर दिया है। इसके लिए पहले चरण में अवसंरचना मानचित्रण एवं प्रारंभिक चरण 30 सितंबर तक चलेगा। इस दौरान निदेशालय सहित अन्य संस्थाओं से विभिन्न प्रमाण पत्र एकत्र करने होंगे। शैक्षणिक विवरण, स्टाफ और अन्य सुविधाओं का लेखा-जोखा तैयार करना होगा।। दूसरे चरण में अक्तूबर के दौरान प्रधानाचार्यों की ओर से ऑनलाइन आवेदनों का पंजीकरण करवाया जाएगा। यदि कोई कमी होगी तो उसे दूर करना होगा। नवंबर और दिसंबर में सीबीएसई द्वारा आवेदनों की जांच और निरीक्षण कार्यक्रम होंगे। जनवरी 2026 में सीबीएसई की टीम निरीक्षण करेगी। पाठ्यपुस्तकों, पाठ्यक्रम पर सरकार की स्वीकृति ली जाएगी। फरवरी में सीबीएसई की ओर से संबद्धता प्रदान करने पर फैसला होगा।
पंजीकरण, निरीक्षण पर प्रति स्कूल खर्च होंगे 70,000 हजार
सीबीएसई संबद्धता के लिए प्रस्तावित स्कूलों के पंजीकरण, निरीक्षण, अपेक्षित शुल्क आदि के रूप में प्रति स्कूल लगभग 70,000 की राशि की आवश्यकता होगी। इसके अलावा छोटी-मोटी मरम्मत, जीर्णोद्धार और परिवर्तन कार्यों के लिए तथा सीबीएसई उप नियमों के अनुरूप अवसंरचनात्मक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए राज्य सरकार को बजट की व्यवस्था करनी होगी।
सीबीएसई संबद्धता में स्थानांतरित करने से यह होगा लाभ
सरकार के अनुसार चयनित स्कूलों को सीबीएसई संबद्धता में स्थानांतरित करने का निर्णय, विकसित हो रहे शैक्षिक पाठ्यक्रम को राष्ट्रीय स्तर पर मानकीकृत और व्यापक रूप से मान्यता प्राप्त होने, विशेष रूप से परिदृश्य और छात्रों व अभिभावकों की आकांक्षाओं को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। सीबीएसई, राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे जेईई, नीट, एनडीए और अन्य व्यावसायिक प्रवेश परीक्षाओं के संदर्भ में है। सीबीएसई संबद्धता में स्थानांतरण से प्रदेश के सरकारी स्कूलों के छात्रों को देश भर के अपने साथियों के साथ समान अवसर मिलेंगे, उनकी शैक्षणिक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी और उच्च शिक्षा तथा पेशेवर कॅरिअर के लिए बेहतर अवसर खुलेंगे। बेशक, यह कदम शिक्षण और अधिगम पद्धतियों में मानकीकरण और गुणवत्ता सुधार को बढ़ावा देगा। सीबीएसई शिक्षाशास्त्र, मूल्यांकन विधियों और कौशल विकास के लिए एकीकृत दृष्टिकोण से न केवल विद्यार्थियों को लाभ होगा, बल्कि सीबीएसई के व्यावसायिक प्रशिक्षण के माध्यम से शिक्षकों के क्षमता निर्माण को भी बढ़ावा मिलेगा।