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वीरभद्र सिंह से फिर पूछताछ, सीबीआई ने एक ही दिन में पूछ डाले 74 सवाल

Sat, 11 Jun 2016 12:00 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह - फोटो : फाइल फोटो
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सीबीआई ने आय से अधिक संपत्ति मामले में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से लगातार दूसरे दिन भी घंटों पूछताछ की। सीबीआई सूत्रों के मुताबिक वीरभद्र से 110 सवाल पूछे जाने थे। इनमें से 36 सवाल वीरवार को पूछे गए। वीरभद्र को बाकी 74 सवालों से शुक्रवार को सामना करना पड़ा।
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सूत्रों ने बताया कि सीबीआई अधिकारियों की ओर से पेश किए गए कुछ ठोस कागजी सबूत का वीरभद्र संतोषप्रद जवाब नहीं दे सके। पूछताछ के दौरान सेब बागान के ठेके के लिए कथित एलआईसी एजेंट से जिस स्टांप पेपर पर समझौता (एमओयू) हुआ था उसकी असलियत पर भी सवाल किए गए।

सीबीआई का दावा है कि अब उनके पास वीरभद्र के खिलाफ पुख्ता सबूत हैं। उन्हें फिर पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है। शुक्रवार को सुबह 11 बजे से वीरभद्र सिंह से पूछताछ शुरू हुई।
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सीबीआई ने एक दिन पहले वीरवार को उनसे सात घंटे से ज्यादा समय तक मैराथन पूछताछ की थी। सीबीआई अधिकारी दावा कर रहे है कि जब उनके खिलाफ मौजूद ‘सबूतों’ से उनका आमना-सामना कराया गया तो वह कोई स्पष्टीकरण नहीं दे पाए।

सीबीआई ने यह बनाया है मामला

सीबीआई ने एक दिन पहले ही बृहस्पतिवार को उनसे सात घंटे से ज्यादा समय तक मैराथन पूछताछ की थी।
सीबीआई ने कहा है कि उसने जांच शुरू की थी जिसमें कथित तौर पर यह पता चला कि यूपीए के शासनकाल में 2009 से 2012 तक केंद्रीय मंत्री के रूप में सिंह ने अपने और अपने परिवार के सदस्यों के नाम पर कथित तौर पर आय के ज्ञात स्रोतों से लगभग 6.03 करोड़ रुपए अधिक की संपत्ति अर्जित की थी।

दिल्ली की एक विशेष अदालत में भ्रष्टाचार रोकथाम कानून के तहत दर्ज प्राथमिकी में सिंह, उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह, एलआईसी एजेंट आनंद चौहान तथा यूनिवर्सल एप्पल एसोसिएट्स लिमिटेड के मालिक चुन्नी लाल चौहान के नाम शामिल हैं। सिंह ने आरोपों से साफ इनकार किया है।
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कृषि आय के रूप में दर्शाई थी भारी रकम

मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह - फोटो : फाइल फोटो
सीबीआई प्रवक्ता ने एक बयान में आरोप लगाया था कि सिंह ने अपना बेहिसाबी धन कृषि आय के रूप में दर्शाकर एक निजी व्यक्ति के जरिए अपने नाम से, अपनी पत्नी के नाम से तथा परिवार के अन्य सदस्यों के नाम से जीवन बीमा निगम की पॉलिसियों में निवेश किया।

सीबीआई ने कहा था कि यह तीन साल की अवधि के लिए सेब के एक बगीचे की देखरेख के लिए उक्त निजी व्यक्ति (चौहान) के साथ एक सहमति पत्र के जरिए किया गया था। निजी व्यक्ति ने कथित तौर पर अपने बैंक खाते में लगभग पांच करोड़ रूपये जमा किए थे और फिर उसने उनके नामों पर एलआईसी पॉलिसी खरीदने के लिए चेकों के जरिए इस रकम को निकाला।
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