सीबीआई की जांच में पता चला है कि अवैध कटान को टीडी और लोगों के अंतिम संस्कार को मिलने वाली लकड़ी के नाम पर अंजाम दिया जा रहा था। अवैध कटान की सूचना पर भी जब कोई कार्रवाई नहीं की गई तो होशियार को भविष्य में इसके लिए दोषी ठहराए जाने की चिंता सता रही थी।
खुद को असहाय महसूस करते हुए उसने अपनी डायरी में अवैध कटान से जुड़े अहम तथ्यों को उजागर किया था। उसने कई लोगों के नाम भी लिखे थे। सीबीआई अब इसी एंगल से जांच आगे बढ़ा रही है।
इस मामले में अभी तक दर्जनों स्थानीय लोगों और वन विभाग के तत्कालीन अधिकारियों से पूछताछ की जा चुकी है। मामले से जुड़े तीन आरोपियों को अदालत जमानत पर रिहा कर चुकी है। माना जा रहा है कि जल्द ही इस संबंध में नई गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
सेरी कतांडा वन बीट में माफिया का पहले से खौफ था। होशियार सिंह से पहले यहां तैनात वन गार्ड गिरधारी लाल पर भी हमला हो चुका था। इसमें उसे काफी चोटें आई थी। यह मामला वर्ष 2016 का बताया जा रहा है।
हालांकि होशियार सिंह ने डायरी में उसे भी अवैध कटान के लिए जिम्मेदार ठहराया था और उसे सीबीआई ने गिरफ्तार भी किया था। लेकिन इस घटना की वजह से भी वन माफिया का डर वन विभाग के कर्मचारियों से लेकर अफसरों तक बना हुआ था।
9 जून 2017 को जब होशियार सिंह के शव को स्थानीय लोगों ने जंगल में लटका देखे जाने के बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची। इसके साथ ही आरएफएसएल मंडी की टीम को भी बुलाया गया। यहां पर कुछ ऐसी गलतियां हुईं जिससे मामला और उलझ गया।
सूत्रों के मुताबिक आरएफएसएल की टीम और पुलिस ने मौके पर वारदात पर मिले बैग को खोलकर उसकी जांच नहीं की। जबकि, बैग में मिली डायरी में साफ बताया गया था कि मामले के बारे में पूरी जानकारी उसके घर पर लिखे गए पत्र में है।
इस बैग को कई दिनों के बाद खोला गया और इससे पहले ही हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया गया। इसके अलावा पेड़ पर चढ़ने के दौरान नाखूनों में फंसी छाल की भी गहनता से जांच नहीं की गई। अगर ऐसा होता तो पहले ही स्थिति साफ हो गई होती।