हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को आय से अधिक संपत्ति मामले में सीबीआई अदालत ने बतौर आरोपी समन जारी किया है। अदालत ने उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह व अन्य सात लोगों को भी बतौर आरोपी समन जारी किया है।
सीबीआई के मुताबिक वीरभद्र सिंह पर केंद्रीय मंत्री रहते हुए 10 करोड़ की आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप है। यह राशि उनकी घोषित आय से 192 फीसदी अधिक पाई गई थी। अदालत ने इन सब आरोपियों को 22 मई को पेश होने का निर्देश दिया है।
पटियाला हाउस स्थित विशेष सीबीआई जज वीरेंद्र कुमार गोयल ने सोमवार को सीबीआई की चार्जशीट पर संज्ञान लेने के बाद वीरभद्र सिंह, प्रतिभा सिंह एलआईसी एजेंट आनंद चौहान उनके सहयोगी चुन्नी लाल, जोगिंद्र सिंह घट्टा, प्रेमराज, लवन कुमार रोच, वाकामुल्ला चंद्रशेखर और राम प्रकाश भाटिया को बतौर आरोपी समन जारी कर पेश होने का निर्देश दिया है।
यहां जानिए पूरा मामला
सीबीआई ने इन सभी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं 109, 465, 471 और भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की धारा 13(2), उपधारा 13(1)(ई)के प्रावधानों के तहत 500 पन्नों की चार्जशीट तीन अप्रैल 2017 को दाखिल की थी। एजेंसी ने चार्जशीट में 225 गवाहों व 442 दस्तावेजों का हवाला दिया है।
सीबीआई ने 23 सितंबर 2016 को वीरभद्र सिंह, उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह, एलआईसी एजेंट आनंद चौहान और एक सहयोगी चुन्नी लाल के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था। सीबीआई ने आरोप पत्र में तर्क रखा है कि वीरभद्र सिंह 28 मई 2009 से 18 जनवरी 2011 और 19 जनवरी 2011 से 26 जून 2012 के दौरान केंद्र सरकार में बतौर मंत्री थे।
सीबीआई ने अनुसार आरंभिक जांच में पाया गया कि वीरभद्र सिंह ने 2009 से 2012 तक केंद्रीय मंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान 6.03 करोड़ रुपये की संपत्ति कथित तौर पर आय से अधिक अर्जित की थी। सीबीआई के अनुसार जांच में पता चला कि उनकी आय 192 प्रतिशत अधिक पाई गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई दिल्ली हाईकोर्ट को ट्रांसफर कर दी थी। हाईकोर्ट ने वीरभद्र सिंह को जांच में शामिल होने और सीबीआई को उन्हें गिरफ्तार न करने का निर्देश 6 अप्रैल 2016 को दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने 5 नवंबर 2016 को वीरभद्र सिंह की याचिका हिमाचल प्रदेश से दिल्ली हाईकोर्ट ट्रांसफर कर दी थी।