कैंसर के उपचार में सुधार से मरीजों को मिलेगा लाभ अमर उजाला ब्यूरो शिमला। आईजीएमसी के रेडियोथैरेपी विभाग (कैंसर अस्पताल) के लिए खरीदी गईं करोड़ों रुपये की दो मशीनों को जल्द मरीजों के उपचार के लिए उपयोग करना शुरू कर दिया जाएगा।
उपचार में उपयोग होने वाली इन मशीनों में लीनियर एक्सीलेटर ली नेक और सीटी सिमुलेटर मशीनों को स्थापित किया जा चुका है। इनकी बाकायदा टेस्टिंग भी चल रही है। इन टेस्ट की रिपोर्ट एटॉमिक एनर्जी रेगुलेटरी बोर्ड (एईआरबी) को नियमित रूप से भेजी जा रही है। इन रिपोर्ट के आधार पर ही इन मशीनों के अस्पताल में उपचार के लिए उपयोग को एईआरबी से अनुमति मिलेगी। आईजीएमसी के रेडियोथैरेपी विभागाध्यक्ष डॉ. मनीश गुप्ता ने माना कि उपचार में उपयोग होने वाली इन दोनों मशीनों का जल्द लोकार्पण किया जाएगा। इन दिनों इन मशीनों की टेस्टिंग की प्रक्रिया चल रही है। इसके बाद अनुमति मिलते ही मशीनों का उपचार में उपयोग किया जाना शुरू कर दिया जाएगा।
लीनियर एक्सीलेटर ली नेक मशीन कैंसर की कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए रेडिएशन देने के लिए उपयोग की जाती है। यह कैंसर पर एक्स रे या इलेक्ट्राॅन किरणों को डालती हैं। इससे कैंसर का सटीक उपचार संभव होता है। यह सिर्फ ट्यूमर को टारगेट करती है, जिससे आसपास के स्वस्थ कोशिकाओं को होने वाला नुकसान कम हो जाता है। सीटी सिमुलेटर मशीन सामान्य सीटी स्कैन मशीन से अलग होती है। इसका उपयोग उपचार की योजना बनाने में सहयोगी साबित होता है। इससे सटीक ट्यूमर मैपिंग संभव होती है। इसमें मरीज के शरीर के अंदर ट्यूमर के स्थान, आकार और आकृति की थ्री डी तस्वीरें बनाती है। इसके अनुसार ही चिकित्सक उपचार की आगामी योजना तैयार करते है कि रेडिएशन कहां और कितनी मात्रा में दिया जाना है।