प्रदेश पर्यटन विकास निगम कर्मचारी महासंघ (भामसं) के प्रदेशाध्यक्ष डाबेराम चौहान और महामंत्री मलकीयत सिंह पठानिया ने कहा कि पूर्व कांग्रेस सरकार में किए घोटालों की जांच और तबादलों के डर से स्वयंभू कर्मचारी नेताओं में हड़कंप है। कहा कि काम के बजाय महज राजनीति चमकाने वाले स्वयंभू कर्मचारी नेताओं ने निगम को पांच सालों में करोड़ों के राजस्व का चूना लगाया है। इंटक से संबंधित ऐसे अधिकारी 20 से 30 वर्षों से शिमला में डटे हुए हैं।
वीरभद्र सरकार में ऐसे लोगों ने तीन से पांच वर्ष में नियमों के विपरीत दो-दो पदोन्नतियां हासिल की हैं। प्रदेश में भाजपा सरकार आने के बाद निगम में काम नहीं करने वाले ऐसे स्वयंभू नेताओं की नियमों के तहत तबादले की प्रक्रिया शुरू हुई तो उन्होंने दोगली नीति अपनाते हुए निगम के कर्मचारियों को गुमराह कर समानांतर महासंघ के चुनाव की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
कर्मचारी महासंघ के त्रैवार्षिक चुनाव वर्ष 2016 में ज्वालमुखी में भारतीय मजदूर संघ के प्रदेश महामंत्री मंगतराम नेगी की अध्यक्षता में हो चुके हैं। इंटक से संबंधित ऐसे कर्मचारी नेता निगम के कर्मचारियों को डरा-धमका कर समानांतर गुट के चुनाव में भाग लेने के लिए बाध्य कर रहे हैं। पठानिया ने कहा कि अब समानांतर गुट तैयार किया तो वह पुलिस में मुकदमा दर्ज करवाएंगे। कहा कि कर्मचारियों की मुख्य मांगों 4-9-14 और 8 फीसदी आईआर समेत अन्य मांगों को बीओडी की बैठक में भेज चुके हैं।