एचपीयू में एसएफआई ने प्रदर्शन तेज कर दिया है। 48 घंटे के क्रमिक अनशन के साथ बुधवार को संगठन ने समरहिल चौक को जाम कर दिया। इस दौरान वाहनों की आवाजाही ठप कर दी गई। कार्यकर्ताओं ने इस दौरान एक भी वाहन को परिसर की ओर नहीं जाने दिया।
संगठन के चार कार्यकर्ताओं के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। भारी संख्या में चौक पर पहले से जुटे एसएफआई कार्यकर्ताओं ने सड़क पर बैठ कर विवि कु लपति और प्रदेश सरकार के खिलाफ लगातार नारेबाजी की।
विवि प्रशासन और प्रदेश सरकार की छात्र मांगों और समस्याओं पर साधी चुप्पी और आंदोलन को नजरअंदाज किए जाने पर भड़के कार्यकर्ताओं ने कुलपति हटाओ विवि बचाओ का नारा दिया और प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी लगातार जारी रखी।
पुलिस की मौजूदगी में हुए इस चक्का जाम के समय में कोई भी विवि का अधिकारी और कर्मचारी विवि गाड़ी लेकर नहीं जा सका। कर्मचारियों और छात्रों सहित आम लोगों को पैदल ही परिसर तक पहुंचना पड़ा।
इस मौके पर हुई सभा को संगठन के कई नेताओं ने संबोधित किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री छात्रों की उठाई जा रही मूलभूत समस्याओं और फीस बढ़ोतरी से पेश आ रही दिक्कतों को उजागर किए जाने के बावजूद चुप्पी साध कर सीधे तौर पर कुलपति के तानाशाही पूर्वक किए जा रहे व्यवहार को संरक्षण दे रहे हैं।
यदि समय रहते विश्वविद्यालय को बचाने और छात्रों को सुविधाएं देने की इस मुहिम को गंभीरता से न लिया गया तो आने वाले समय में आंदोलन और उग्र होगा, जिसके लिए पूरी तरह से कुलपति जिम्मेदार होंगे। मुख्यमंत्री शिक्षा में गुणात्मक सुधार की बात करते हैं, मगर सही मायने में सरकार प्रदेश के एक मात्र विश्वविद्यालय तक को चलाने में नाकाम साबित हुई है।
सीएम से मिलने का नहीं दिया जा रहा समय
एसएफआई इकाई सचिव विपिन और उपाध्यक्ष प्रेम जसवाल का कहना है कि एसएफआई इस आंदोलन और इसके माध्यम से उठाई जा रही मांगों को लेकर मुख्यमंत्री से मिलने का समय मांग रही है, मगर समय नहीं दिया जा रहा है।
जिससे साफ है कि सरकार समस्या सुनना ही नहीं चाहता है। अब एसएफआई आंदोलन को आम जनता के बीच लेकर जा रही है। उन्होंने कहा कि 63वें दिन अनिल कुमार, सुरेंद्र कुमार और देवेंद्र 48 घंटे के क्रमिक अनशन पर बैठे।