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एसएफआई ने गिनाईं कुलपति के कार्यकाल की नाकामियां

Mon, 06 Jun 2016 10:19 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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प्रेस वार्ता करते एसएफआई के नेता। - फोटो : अमर उजाला
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आम छात्रों से जुड़ी 46 मांगों को लेकर विवि में क्रमिक अनशन कर रही एसएफआई की विवि इकाई ने कुलपति द्वारा अपने पांच साल में गिनाई गई उपलब्धियों के जवाब देने को शनिवार को राजधानी में प्रेस वार्ता की। इसमें इकाई के अध्यक्ष नोवल ठाकुर और सचिव विपिन ने कहा कि कुलपति अपने कार्यकाल को विवि का स्वर्णिम समय करार देने का प्रयास कर रहे हैं, मगर सच्चाई इसके विपरीत है।
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उन्होंने कहा कि कुलपति के इस पांच वर्ष के कार्यकाल में विवि में एक से बढ़कर एक छात्र विरोधी फैसले लिए गए और लगातार सुविधाओं में हो रही कमी के चलते विवि का शैक्षणिक स्तर, शोध गतिविधियां कम हुई हैं। इन नेताओं ने कहा कि यही वजह है कि पिछले 59 दिनों से उनके संगठन को मूलभूत सुविधाओं की मांगें मनवाने को 48 घंटे का क्रमिक अनशन चलाना पड़ रहा है।

रूसा को लागू करने को अपनी उपलब्धि बता रहे कुलपति ने स्वयं माना की इसमें खामियां रही हैं, जिसके चलते आज विश्वविद्यालय प्रशासन को अपनी मर्जी से लागू किए रूसा के प्रारूप को बदलकर यूजीसी की गाइडलाइन और डाक्यूमेंट के मुताबिक इसे नए सत्र से लागू करना पड़ रहा है। पूर्व में रूसा के तहत यूजी कोर्स कर रहे करीब हजारों छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हुआ है।
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दूसरी उपलब्धि में ऊना और मंडी में रीजनल सेंटर खोलने की घोषणा ख्याली पुलाव है, जिसके लिए अभी जमीन तक नहीं मिली है। रीजनल सेंटर धर्मशाला की स्थिति उनके कार्यकाल में और खराब हुई है, आज वहां शिक्षकों की कमी सहित कई तरह की समस्याएं छात्र झेल रहे हैं।  वहां से विवि को डेप्यूटेशन पर शिक्षक बुलाकर काम चल रहा है।

एचपीयू के नेट/जेआरएफ पास करने वाले छात्रों की संख्या में लगातार गिरावट आई है। विवि में चल रही सैकड़ों शिक्षकों की कमी के चलते शिक्षण कार्य के साथ ही शोध गतिविधियां भी प्रभावित हुई हैं। नोवल ने कहा कि इक्डोल में लगातार गिर रही छात्रों की संख्या के चलते जो संख्या कभी 60 हजार हुआ करती थी, आज घट कर महज 14 से 15 हजार ही रह गई है।

मल्टी फैकल्टी भवन का निर्माण अधर में लटका है, 86 लाख खर्च करने के बावजूद इसे विवि के नाम नहीं किया जा सका है। उन्होंने कहा कि इन सभी नकामियों के खिलाफ उठने वाली आवाज को दबाने को प्रशासन ने तीन सालों से प्रत्यक्ष छात्र संघ चुनाव बंद करवाए है।

इन नेताओं ने कहा कि विवि में धर्म गुरू दलाईलामा सहित प्रतिष्ठित लोगों को बुलाया गया, मगर इससे विवि और छात्रों को क्या लाभ हुआ है। उन्होंने कहा कि एसएफआई फीस बढ़ोतरी पर बनी हाई पॉवर कमेटी की रिपोर्ट सार्वजनिक करने, शिक्षकों की भर्ती,

क्लास रूम की व्यवस्था के साथ ही छात्र संघ चुनाव बहाली जैसी मूल और आम छात्रों से जुड़ी मांगों को लेकर आंदोलन कर रही है, कुलपति इन मांगों का समाधान करने के बजाय अपनी उपलब्धियां गिनाने में लगे हुए हैं, यदि मांगे जल्द न मानीं गईं तो आंदोलन और उग्र होना तय है, इसके लिए पूरी तरह से कुलपति जिम्मेदार होंगे।
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