राष्ट्रीय प्रेस दिवस पर पहली बार विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जन संचार विभाग ने संगोष्ठी करवाई। विवि के कुलपति प्रो. एडीएन वाजपेयी बतौर मुख्य अतिथि शरीक हुए। हिंदुस्तान टाइम्स के वरिष्ठ स्थानीय संपादक रमेश विनायक ने मुख्य वक्ता के रूप में शिरकत की और अमर उजाला के स्थानीय संपादक दयाशंकर शुक्ल ने बतौर विशेष अतिथि हिस्सा लेकर छात्रों को पत्रकारिता के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी।
विवि के पत्रकारिता विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. विकास डोगरा और शिक्षक शशि कांत शर्मा ने अतिथियों का स्वागत किया। इस दौरान विवि के कुलसचिव डॉ. पंकज ललित, चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी की सायकोलॉजी की शिक्षक डॉ. सीमा विनायक भी मौजूद रहीं। एचटी के स्थानीय संपादक रमेश विनायक ने ‘टकराव क्षेत्र की रिपोर्टिंग मीडिया के लिए चुनौती‘ विषय पर कारगिल युद्ध और पंजाब में हुए दंगों के दौरान रिपोर्टिंग के अपने अनुभवों को साझा किया।
रमेश विनायक ने छात्रों को बताया कि किस तरह से ऐसे संवेदनशील, टकराव, युद्ध, दंगों वाले क्षेत्र से रिपोर्टिंग करते हुए मुश्किलें पेश आती हैं। उन्होंने कहा कि टकराव, युद्ध और दंगा प्रभावित क्षेत्र से रिपोर्टिंग करते समय राष्ट्रीय सुरक्षा, मानवाधिकार हनन, पत्रकारिता के मूल्यों को ध्यान में रखना होता है। इसके साथ ही एक पत्रकार को मौके पर दंगे के कारणों और इसके लिए जिम्मेदार और प्रभावित लोगों का पता लगाकर इसकी सच्चाई को सामने लाने और उसे रिपोर्ट के रूप में देश के सामने लाने की चुनौती होती है।
पत्रकारिता में भावनाएं जीवित तो कोई खतरा नहीं : प्रो. वाजेपयी
विवि के कुलपति प्रो. एडीएन वाजपेयी ने कहा कि पत्रकारिता में यदि भावनाएं जीवित हैं तो पत्रकारिता और समाज के लिए कोई खतरा नहीं है। काल समय, देश की परिस्थिति को ध्यान में रखकर पत्रकारिता की जानी चाहिए। मूल्य आधारित पत्रकारिता जरूरी है। उसे हर गतिविधि पर पैनी निगाह रखकर अपनी रिपोर्ट तैयार कर जनता के समक्ष सच्चाई लाने की जिम्मेदारी होती है।
हमेशा रहेगा सार्थक पत्रकारिता का युग : दयाशंकर शुक्ल
‘अमर उजाला’ के स्थानीय संपादक दयाशंकर शुक्ल ने कहा कि सार्थक पत्रकारिता का युग हमेशा रहेगा। पत्रकारिता के मूल्यों को ध्यान में रखकर ही पत्रकारिता होनी चाहिए। पत्रकार और मीडिया को आम जनता की आवाज के रूप में जन और राष्ट्र हित में पत्रकारिता करने पर बल दिया। उन्होंने प्रदेश सरकार के अवैध संपत्ति को वैध करवाने के लिए विधानसभा से पारित बिल का उदाहरण देते हुए बताया कि इसका सिर्फ मीडिया ने विरोध किया, जिसे न्यायालय ने सही करार देकर इस पर रोक लगाई। इसके परिणामस्वरूप यह बिल राजभवन में रोक दिया गया।
उन्होंने सामाजिक सरोकार से जुड़ी पत्रकारिता के उदाहरण के रूप में ऊना जिले की गरीब छात्रा बक्शो देवी के नंगे पांव जिला स्तरीय प्रतियोगिता में दौड़ कर प्रथम आने के मामले को उजागर करने और उसके बाद उसकी मदद के लिए उठे हाथ और सरकार की ओर से दी गई सुविधाओं के बारे छात्रों को जानकारी दी।