राज्यस्तरीय खेलकूद प्रतियोगिताओं में वुशु के नाम पर मात्र औपचारिकताएं ही पूरी की जा रही हैं। वुशु के खिलाडि़यों को महज कुछ दिनों का प्रशिक्षण देकर भिड़ाया जा रहा है।
विभागीय अधिकारियों की मानें तो औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में शारीरिक शिक्षकों के पद स्वीकृत न होना व स्वीकृत पदों का रिक्त होना ही इसका मुख्य कारण है। 28वीं राज्यस्तरीय खेलकूद प्रतियोगिता बिलासपुर आईटीआई में हुई।
इसमें भले ही वुशु को शामिल किया गया है, लेकिन चंद आईटीआई को छोड़ कर शेष में वुशु कोच नहीं हैं। कई मर्तबा तो खिलाड़ी के भार के मुताबिक अन्य खिलाड़ी न होने की सूरत में खिलाड़ी को विजेता घोषित कर दिया जाता है।
तकनीकी शिक्षा बोर्ड के निदेशक शुभकरण सिंह ने बताया कि प्रदेश भर की अधिकांश आईटीआई में शारीरिक शिक्षकों के पद स्वीकृत ही नहीं हैं। प्रदेश में स्वीकृत सात पदों में भी तीन पद रिक्त चले हुए हैं। रिक्त पदों के बारे में सरकार को अवगत करवाया गया है।
वुशु प्रतियोगिता एक प्रकार की आत्मरक्षा की कला है। इस कला के तहत कोई हमला करता है तो उससे अपना बचाव किया जा सकता है। वुशु के तहत महिलाओं को आत्म रक्षा के लिए विशेष गुर सिखाए जाते हैं।