एचपीयू में छात्र गुटों के बीच हिंसक घटनाएं रोकने को विवि प्रशासन ने सख्त फैसले लिए हैं। वीरवार को छात्र गुटों के बीच हुई हिंसा के बाद शुक्रवार को कुलपति प्रो. एडीएन वाजपेयी की अध्यक्षता में बैठक हुई। इसमें विवि परिसर में शांति भंग करने वालों को किसी भी सूरत में न बख्शने का निर्णय लिया गया।
कुलपति ने साफ किया कि एफआईआर में जिन छात्रों नेताओं के नाम हैं, उन्हें कंडक्ट प्रोबेशन में रखा जाएगा। पिछले एक महीने में विवि परिसर में हिंसा मामले में अब तक करीब 50 छात्रों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो चुकी है। इन पर निलंबन की गाज गिर सकती है। छात्रावासों में हिंसक घटनाओं को अंजाम देने में संलिप्त और बार-बार एफआईआर में नाम आने वालों का निष्कासन किया जाएगा। इस संदर्भ में सभी छात्र संगठनों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं। इन्हें शुक्रवार से लागू भी कर दिया गया है।
कुलपति ने अधिष्ठाता अध्ययन को इसकी प्रक्रिया शुरू करने के आदेश दिए। यह फैसला भी हुआ कि पहले से निष्कासित छात्र छात्रावास और विवि परिसर में हिंसा करते पाए जाते हैं तो उनके खिलाफ पुलिस में अलग से विवि प्रशासन एफआईआर दर्ज करेगा। कुलपति ने कहा कि विवि परिसर का माहौल बिगाड़ने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
विवि अब हिंसा मामले में जीरो टालरेंस अपना चुका है। बैठक के बाद उन्होंने वीरवार देर शाम को ही परिसर में आए दिन पोस्टर को लेकर होेने वाली लड़ाई रोकने को पोस्टर में सिर्फ छात्रों की डिमांड उठाने की संगठनों को छूट दी है। वे एक-दूसरे के खिलाफ भड़काऊ बयान नहीं लिख सकेंगे। परिसर में बेवजह छात्र संगठन कार्यकर्ता एक साथ खड़े नहीं होंगे। बैठक में विवि के तमाम अधिकारी मौजूद रहे।
शांति बनाए रखें छात्र, वरना सख्त कार्रवाई- विवि के कुलपति प्रो. एडीएन वाजपेयी, डीएस, डीएसडब्लू, चीफ वार्डन सहित सभी विवि के अधिकारी और वार्डन की टीम ने मुख्य चौक पर सुबह 9:45 पर खड़े होकर छात्रों से विवि परिसर में शांत माहौल बनाने की अपील की। कुलपति ने कहा कि भविष्य में और सख्ती बरती जाएगी।
जिला पुलिस को भी ताजा आदेशों को लेकर अवगत करवाकर इसे सख्ती से लागू किए जाने को कहा गया है। कुलपति प्रो. वाजपेयी ने माना कि हिंसा में शामिल रहे छात्र नेताओं और छात्रों के निलंबन और निष्कासन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसकी बाकायदा सूची तैयार की जा रही है। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में नैक टीम के आने से ठीक एक दिन पूर्व एक अक्तूबर को टैगोर छात्रावास में हिंसा की घटना हुई थी, जिसमें आठ से अधिक छात्र संगठन कार्यकर्ता घायल हुए।
टीम के चले जाने के बावजूद 7 अक्तूबर को डीएस की अध्यक्षता में जांच कमेटी बनी। चीफ वार्डन वार्डन बदले, मगर आज तक जांच कमेटी की रिपोर्ट नहीं आई। रिपोर्ट का इंतजार किए बिना ही अब कुलपति ने अपने स्तर पर ही एफआईआर को आधार पर निलंबन और निष्कासन का अधिकारियों की बैठक में फैसला ले लिया है।
जो राजनीतिक और हिंसा गतिविधियों में सीधे और परोक्ष रूप से संलिप्त रहे कार्यकर्ताओं और नेताओं पर भारी पड़ेगा। छात्रावास हिंसा में 17 एसएफआई के कार्यकर्ता गिरफ्तार हुए, उसके अगले रोज 21 एबीवीपी के कार्यकर्ता गिरफ्तार हुए। इसके बाद भी जब भी हिंसा हुई, उसमें गिरफ्तारियां होती रही। बीते रोज की घटना में छह एबीवीपी कार्यकर्ता गिरफ्तार हुए है। इन सभी हिंसा मामलों में करीब 50 छात्रों के नाम हो सकते हैं।