हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से संबद्ध सरकारी और निजी मेडिकल व डेंटल कॉलेजों की अलग-अलग वर्ग और कोटे के तहत खाली रहीं सीटों पर प्रवेश को शनिवार से काउंसलिंग का दूसरा दौर शुरू होगा।
विवि सभागार में होने वाली काउंसलिंग में प्रवेश पाने वाले छात्रों को हर हाल में 23 अगस्त को आवंटित कॉलेज में रिपोर्ट करनी होगी।
परीक्षा नियंत्रक कार्यालय की ओर से इस काउंसलिंग के लिए मेरिट के आधार पर पात्र छात्रों की सूची वेबसाइट www.hpuniv.nic.in,www.hpuniv.inपर उपलब्ध करवा दी गई है।
इसे छात्र डाउनलोड कर सकते है। काउंसलिंग की इस प्रक्रिया में सोलन के निजी मेडिकल कॉलेज के साथ विवि से संबद्ध सभी निजी डेंटल कॉलेजों की सीटें भी भरी जानी हैं।
खाली एनआरआई सीटें होंगी पेड सीट जनरल में तबदील
काउंसलिंग की इस प्रक्रिया में सरकारी और निजी कॉलेजों में खाली रहीं एनआरआई की सीटों को पेड जनरल में बदलकर भरा जा रहा है। इसमें प्रवेश लेने वाले छात्रों को तय फीस चुकानी होगी, जो निजी कॉलेजों के लिए तय की गई है।
एनआरआई की सामान्य वर्ग में तबदील कर भरी जाने वाले सीटें सिर्फ मूल हिमाचली छात्रों से भरी जाएंगी, जो स्टेट कोटा के लिए प्रोस्पेक्टस में दी गई शर्तों और इसमें पहले दौर की काउंसलिंग के दौर में मेरिट कम च्वायस के मुताबिक उन छात्रों से भी भरी जाएंगी।
जो या तो वेटिंग में है या एमबीबीएस में सीटें न मिलने के कारण डेंटल कॉलेजों में प्रवेश ले चुके थे। सरकारी मेडिकल कॉलेजों में ही एनआरआई की 27 सीटें खाली हैं, जो पेड में बदली जाएंगी।
किस कॉलेज में कितनी सीटें खाली
आईजीएमसी में 13, डा. आरपीजीएमसी टांडा में छह, डा. वाईएस परमार मेकिडल कॉलेज में 14 (12 एनआरआई), एलबीएस जीएमसी नेरचौक 15 (एक एनआरआई), जेएलएन जीएमसी चंबा 17 (13 एनआरआई ), एचपीजीडीसी शिमला 18 (2 एनआरआई) सीटें खाली हैं।
जबकि निजी कॉलेजों में मैनेजमेंट और स्टेट कोटा के तहत सीटें खाली हैं। इनमें एमएमएमसी कुमारहट्टी में 38 एमबीबीएस, एचडीसी सुंदरनगर में 14, एमएनडीएवी डेंटल कॉलेज में 12, बीडीसी नालागढ़ में 13 और एआईडीएस पांवटा साहिब में 19 सीटें खाली हैं
एनआरआई सीटें बढ़ने पर खाली रह गई थीं सीटें
सरकार ने इस बार एमबीबीएस की एनआरआई की सीटें नए खुले सरकारी कॉलेजों में बढ़ा थीं। लेकिन, ये सीटें खाली रह गईं। इस कारण अब इन सीटों को सामान्य वर्ग से पेड सीट में बदलकर भरना पड़ रहा है।
इनकी फीस एमएमएएमसी कुमारहट्टी को तय स्टेट कोटे की फीस के बराबर रखी गई है। यदि वह बढ़ती है, तो सरकारी कॉलेजों की इन सीटों की फीस भी बढ़ जाएगी।
इन 27 सीटों के भर जाने से प्रदेश में इतने नए चिकित्सक तैयार होंगे। पूरे कोर्स की 5.50 लाख प्रति वर्ष के हिसाब से करीब 27. 50 लाख पूरे कोर्स की फीस चुकानी होगी।