हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में पहली बार प्राच्य भारतीय विद्या का पाठ्यक्रम शुरू किया जाएगा। बौद्ध धर्मगुरु दलाईलामा के सहयोग से देश में पहली बार एनशिएंट इंडियन विस्डम प्राच्य भारतीय विद्या पाठ्यक्रम शुरू किया जा रहा है। बौद्ध विद्या केंद्र के अध्यक्ष वीएस नेगी ने बताया कि छह माह का सर्टिफिकेट कोर्स इसी शैक्षणिक सत्र से शुरू किया जा रहा है।
धर्मशाला कॉलेज में यह कोर्स शुरू करने की तैयारी कर ली गई है। इसके पाठ्यक्रम मसौदे को सभी शैक्षणिक समितियों से अनुमोदित करवा दिया गया है। पाठ्यक्रम में प्रवेश से संबंधित जानकारी विवि की वेबसाइट पर उपलब्ध करवाई गई है।
पाठ्यक्रम के प्रेरणास्रोत बौद्ध धर्मगुरु दलाईलामा हैं। प्रदेश शिक्षा विभाग की अनुमति से एचपीयू पाठ्यक्रम को अंतिम रूप दे चुका है। पाठ्यक्रम का मुख्य उद्देश्य भारतीय युवाओं को विविध प्राचीन भारतीय ज्ञान और संस्कृति से अवगत करवाना है।
मानव और प्रकृति के बीच समन्वय स्थापित करने का प्रयास करना, इसका उद्देश्य है। पाठ्यक्रम से युवाओं को अपने मन की प्रवृत्तियों को समझने में मदद मिलेगी। वहीं, दावा किया जा रहा है कि आधुनिकता की इस दौड़ में मानवीय मूल्यों की उपयोगिता को समझकर, उन्हें अपने व्यावहारिक जीवन में उतारने में भी मदद मिलेगी।
पाठ्यक्रम में प्रवेश को जमा दो होगी शैक्षिक योग्यता
इस पाठ्यक्रम में प्रवेश पाने के लिए जमा न्यूनतम शैक्षिक योग्यता रखी गई है। कोर्स में तीस सीटें होंगी। इन्हें युवाओं की रुचि और रुझान को देखते हुए भविष्य में बढ़ाया भी जा सकता है। इसमें डिप्लोमा और उच्चतर डिप्लोमा पाठ्यक्रम भी भविष्य में शुरू किए जाने की योजना है। कोर्स को धर्मशाला में अच्छा रुझान मिलने के बाद अन्य महाविद्यालय में भी शुरू किया जा सकता है।