हिमाचल प्रदेश तकनीकी विश्वविद्यालय हमीरपुर एचपीयू की तुलना में तीन गुना से अधिक फीस वसूल रहा है। महाविद्यालयों से प्रति वर्ष संबद्धता और परीक्षा केंद्र निर्माण के तौर पर कई तरह के शुल्क वसूल रहा है। तकनीकी विवि प्रदेश के महाविद्यालयों के विद्यार्थियों से प्रतिवर्ष तीन-तीन हजार रुपये फंड भी ले रहा है। तकनीकी विवि में स्नातकोत्तर के विद्यार्थियों ने बुधवार को अत्यधिक फीस वसूली का विरोध करते हुए उपायुक्त हमीरपुर हरिकेश मीणा के माध्यम से राज्यपाल कलराज मिश्र को ज्ञापन भेजा।
विद्यार्थियों ने बताया कि वह प्रथम सेमेस्टर में 42 हजार रुपये फीस अदा कर चुके हैं। अभी तीसरे सेमेस्टर में 36,350 रुपये शुल्क वसूला जा रहा है। यह प्रदेश के निर्धन और मध्यम परिवारों के बच्चों के साथ अन्याय है। जब तकनीकी विवि के अधिकारियों से पूछा जाता है तो रटा-रटाया जवाब होता है कि यह यूनिवर्सिटी सेल्फ फाइनांस के तहत चल रही है। सरकार से अभी तक यूनिवर्सिटी को एक रुपये तक फंड नहीं मिला।
हैरानी की बात है कि तकनीकी विवि के स्टाफ समेत अन्य सभी तरह के खर्चे विद्यार्थियों से वसूली जानी वाली फीस से पूरे किए जा रहे हैं। वर्ष 2011 में प्रदेश भाजपा सरकार में तकनीकी विश्वविद्यालय की हमीरपुर में स्थापना हुई है। वर्तमान में इस महाविद्यालय के अधीन चार दर्जन से अधिक सरकारी और निजी महाविद्यालय संबद्धता प्राप्त चल रहे हैं।
प्रदेश विवि शिमला को प्रतिवर्ष सरकार से 100 करोड़ रुपये से अधिक ग्रांट मिलती है। उधर, तकनीकी विवि के रजिस्ट्रार राजेश शर्मा से बात करने का प्रयास किया, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया। विवि के डीन अकादमिक प्रो. कुलभूषण चंदेल ने कहा कि विवि को सरकार से कोई ग्रांट प्राप्त नहीं हुई है। विवि को शुरू से सेल्फ फाइनांस के तहत चलाया जा रहा है।
यह है तकनीकी विवि का फीस ढांचा
तकनीकी विवि बीटेक, एमबीए और बी-फार्मेसी का प्रत्येक सेमेस्टर 30 हजार रुपये, एमसीए 35 हजार रुपये, जबकि एमएससी फिजिक्स और पर्यावरण विज्ञान 42 हजार रुपये शुल्क वसूल कर रहा है। अगर प्रदेश विवि शिमला की बात करें तो यहां एमएससी फिजिक्स 13,300 रुपये फीस है।