पढ़ाई और नौकरी के लिए विदेश जाने के इच्छुक युवाओं की राह हिमाचल सरकार आसान करने वाली है। यह कवायद विदेश मंत्रालय से भेजे गए पत्र के बाद शुरू हुई है। पत्र में मंत्रालय ने सर्टिफिकेट अटेस्ट करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।
मंत्रालय ने आवेदकों को होने वाली परेशानियों का उल्लेख करते हुए सर्टिफिकेट अटेस्ट करने की प्रक्रिया को सरल करने के लिए कहा है। मंत्रालय से पत्र मिलने के बाद राज्य सरकार जरूरी दस्तावेजों को अटेस्ट करने की प्रक्रिया को पब्लिक सर्विस गारंटी एक्ट (पीएसजीए) के तहत लाने की तैयारी में है।
बता दें कि विदेश जाने के इच्छुक युवाओं को पहले राज्य सरकार के अधिकृत प्राधिकरण से अपने शैक्षणिक व अन्य दस्तावेजों को प्रमाणित कराना होता है। इसके बाद दस्तावेज विदेश मंत्रालय के पास जाते हैं, जहां से मंत्रालय उन दस्तावेजों को अंतिम रूप से प्रमाणित करता है। वर्तमान में विदेश मंत्रालय में जो व्यवस्था है, उसके तहत महज एक दिन में दस्तावेज प्रमाणित हो जाते हैं।
लेकिन राज्य में दस्तावेजों को अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता से प्रमाणित कराने में कई दिन लग जाते हैं। कुछ मामलों में सामने आया है कि सक्षम अधिकारी दस्तावेज सत्यापित करने में आनाकानी कर रहे थे। यही नहीं, कई मामलों में अधिकारी सत्यापन करने से पहले विदेशी विश्वविद्यालय या विदेशी नियोक्ता के दस्तावेज मांग रहे हैं।
इन वजहों से सत्यापन करने का काम कई दिन तक लटका रहता है जिससे युवाओं को परेशानी उठानी पड़ती है। कई युवाओं ने इसकी शिकायत विदेश मंत्रालय में की, जिसके बाद विदेश मंत्रालय ने पत्र लिखकर प्रदेश सरकार को दस्तावेज प्रमाणित करने की प्रक्रिया सरल करने को कहा है।
तय समय में सत्यापित होंगे दस्तावेज
युवाओं को परेशानी से बचाने के लिए दस्तावेज सत्यापित करने की प्रक्रिया में बदलाव करने की तैयारी चल रही है। प्रदेश के प्रशासनिक सुधार विभाग ने इस क्रम में सभी विभागों के अतिरिक्त मुख्य सचिवों, प्रधान सचिवों, सचिवों व डिप्टी कमिश्नरों को सर्टिफिकेट सत्यापित करने के काम का विकेंद्रीकरण करने को कहा है। साथ ही शिक्षा, गृह, राजस्व जैसे विभागों को दस्तावेज प्रमाणित करने की प्रक्रिया को पब्लिक सर्विस गारंटी एक्ट के तहत लाने को कहा है।
मंत्रालय विकेंद्रीकृत कर चुका है सत्यापन का काम
विदेश मंत्रालय पहले ही दस्तावेज सत्यापित करने के काम को विकेंद्रीकृत कर चुका है। पहले मंत्रालय का दिल्ली कार्यालय ही दस्तावेजों को अंतिम रूप से प्रमाणित करता था। लेकिन युवाओं को हो रही दिक्कतों को देखते हुए मंत्रालय ने क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालयों के अलावा मुंबई, चेन्नई, हैदराबाद, गुवाहाटी और कोलकाता में विदेश मंत्रालय के शाखा सचिवालयों के हेड को भी दस्तावेज प्रमाणित करने के लिए अधिकृत किया है।
तय समय में पब्लिक को सर्विस देना जरूरी
प्रशासनिक सुधार विभाग की सचिव पूर्णिमा चौहान ने बताया कि पब्लिक सर्विस गारंटी एक्ट का उद्देश्य ही लोगों को समयसीमा के अंदर सेवा दिलाना है। ऐसे में शिक्षा और गृह विभाग को खासकर यह प्रस्ताव भेजा गया है कि दस्तावेज अटेस्ट करने जैसे कार्य को भी एक्ट के अंतर्गत लाएं ताकि विदेश में नौकरी या पढ़ाई का अवसर पाने वाले युवाओं को सिर्फ दस्तावेज अटेस्ट कराने में देरी की वजह से मौका न गंवाना पड़े।