फीस बढ़ाने को लेकर एडमिशन लेने से इनकार करने वाले महर्षि मार्कंडेश्वर विश्वविद्यालय पर सरकार मेहरबान हो गई है। सरकार ने तीन साल के लिए हर साल पांच प्रतिशत फीस वृद्धि को मंजूरी दे दी है। वर्तमान सत्र के लिए भी पांच प्रतिशत फीस वृद्धि की है। शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में स्टेट कोटे से चयनित बच्चों का प्रवेश लेने से विवि ने यह कहते हुए इनकार किया था कि सरकार से फीस बढ़ाने पर बात चल रही है।
अभिभावकों के हाईकोर्ट जाने और केंद्र तथा राज्य सरकार की सख्ती के बाद विवि ने दाखिला दे दिया। हाईकोर्ट ने सरकार को फीस रिव्यू करने के आदेश दिए। इसके बाद प्रधान सचिव स्वास्थ्य प्रबोध सक्सेना की अध्यक्षता में फीस रिव्यू कमेटी बनी। करीब छह माह बाद सरकार ने शैक्षणिक सत्र 2016-17 की फीस को पांच प्रतिशत बढ़ाने की मंजूरी दे दी।
साथ ही साल 2017-18 की फीस को दस प्रतिशत और 2018-19 की भी फीस को पंद्रह प्रतिशत बढ़ाने की मंजूरी दी। आईआरडीपी/बीपीएल श्रेणी के बच्चों की फीस में कोई बदलाव नहीं किया है। आने वाले सालों के लिए भी इस श्रेणी के बच्चों की फीस को सरकारी मेडिकल कॉलेजों के बराबर रखा जाएगा।
बढ़ी फीस जमा करने के निर्देश
वर्तमान में स्टेट कोटे में पांच लाख, मैनेजमेंट कोटे में 9 लाख, पांच प्रतिशत डेवलपमेंट चार्ज और एनआरआई सीटों के लिए 24 हजार यूएस डॉलर तथा पांच प्रतिशत डेवलपमेंट चार्ज सालाना फीस ली जा रही थी। सरकार की नोटिफिकेशन के तहत अब स्टेट कोटे की फीस 5.25 लाख हो गई है।
मैनेजमेंट कोटे की फीस को नौ लाख से 9.92 लाख और एनआरआई कोटे की फीस 26,460 यूएस डॉलर कर दी गई है। विवि ने अभिभावकों को बढ़ी फीस को दो किस्तों या एकसाथ जमा करने को कह दिया है।
किस श्रेणी में कितनी बढ़ी फीस
साल 2017-18 में स्टेट कोटे की फीस दस प्रतिशत बढ़ाते हुए 5.50 लाख की गई है। 2018-19 में 15 प्रतिशत बढ़ोतरी के साथ 5.75 लाख किया है। इसी तरह मैनेजमेंट कोटे की फीस को भी साल 2017-18 में दस प्रतिशत बढ़ाते हुए 10.39 लाख और साल 2018-19 के लिए 10.86 लाख कर दिया है। एनआरआई कोटे की फीस भी 2017-18 में 27,720 यूएस डॉलर और साल 2018-19 में 28,980 यूएस डॉलर किया गया है।
फीस बढ़ोतरी के खिलाफ कोर्ट जाएंगे अभिभावक
प्रदेश मेडिकल स्टूडेंट्स गार्जियन एसोसिएशन के अध्यक्ष रजनीश राणा ने फीस बढ़ने पर नाराजगी जताई है। कहा कि मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ने खुद फीस न बढ़ने का कई बार आश्वासन दिया था, लेकिन फीस बढ़ाकर उन्होंने अभिभावकों के साथ धोखा किया है।
रिव्यू कमेटी ने कॉलेज को बैंक दस से बीस लाख की बैंक गारंटी देने की भी बात कही है। मांग की है इस गारंटी के क्लॉज को तत्काल वापस लिया जाए नहीं तो एसोसिएशन इसके खिलाफ कोर्ट जाएगी।