प्रदेश के सरकारी स्कूलों में कॉन्वेंट स्कूलों की तर्ज पर सुविधाएं देने की तैयारियां शुरू हो गई हैं। हिमाचल ने 1200 करोड़ का वार्षिक प्लान तैयार किया है। दो फरवरी को नई दिल्ली में होने जा रही प्रोजेक्ट अप्रूवल बोर्ड की बैठक में प्लान को रखा जाएगा। केंद्र सरकार कितना बजट मंजूर करती है, अब सब की निगाहें इस पर ही टिकी हैं।
सर्व शिक्षा अभियान और राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के राज्य परियोजना निदेशालय ने वार्षिक प्लान के तहत प्रदेश के प्राइमरी स्कूलों में बायोमीट्रिक मशीनें लगाने का प्रस्ताव तैयार किया है। अधिकारियों का मानना है कि बायोमीट्रिक मशीनें लगने से स्कूलों में शिक्षकों की अधिक से अधिक उपस्थिति दर्ज होगी।
प्लान के तहत हिमाचल के सभी सरकारी स्कूलों में आईसीटी लैब स्थापित करने की योजना है। शिक्षा विभाग का तर्क है कि स्कूलों में मॉडर्न क्लास रूम बनाए जा रहे हैं। काफी स्कूलों में आईसीटी लैब भी बनाई जा चुकी है। बेहतर माहौल के लिए इनकी ज्यादा जरूरत है। प्लान में टीचर लर्निंग एनवायरनमेंट पर अधिक फोकस किया गया है।
इसके तहत स्कूलों में बेहतर शैक्षणिक माहौल बनाने के लिए शिक्षकों को ट्रेनिंग करवाकर उन्हें टीचिंग की नई तकनीक के बारे में बताने के लिए विभिन्न योजनाएं बनाई गई हैं। पढ़ाई को कैसे ज्यादा रोचक बनाया जा सकता है, इसकी ट्रेनिंग भी शिक्षकों को दी जाएगी।
सर्व शिक्षा अभियान ने स्कूलों में लर्निंग लेवल बढ़ाने और क्वालिटी एजूकेशन को लेकर प्रेरणा और प्रयास कार्यक्रम को लागू किया है। इसके काफी अच्छे परिणाम देखने को मिले हैं। एसएसए और आरएमएसए इन दोनों ही कार्यक्रमों को प्रदेश के सभी स्कूलों में सख्ती से लागू करने जा रही है। इसके लिए भी केंद्र से बजट की डिमांड की गई है।