ये फीस स्वास्थ्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में तय की गई थी। इसके बाद दोबारा शिक्षा सचिव की अध्यक्षता में एक बैठक उनकी सेवानिवृत्ति से पहले रखी गई, जिसमें स्टेट कोटे की फीस को बढ़ाकर सात लाख रुपये कर दिया गया।
मैनेजमेंट कोटे की फीस 12 लाख रुपये की गई। साथ में ये भी तय किया गया कि ये फीस हर साल दस फीसदी बढ़ा दी जाएगी। उन्होंने कहा कि इस रफ्तार से तो ये फीस पांच साल में 80-90 लाख रुपये तक देनी होगी।
उन्होंने बताया कि इस विश्वविद्यालय में 300 एमबीबीएस सीटें हैं। ऐसे में बच्चोें की फीस में मनमाफिक बढ़ोतरी करके अभिभावकों के सामने एक बड़ी समस्या खड़ी कर दी गई है।
11 जून को सरकार ने एक बैठक रखी है। अगर इसमें समीक्षा कर फीस नहीं घटाई गई तो वे कड़े कदम उठाने को मजबूर होंगे। इस संबंध में एमएमयू के अधिकारियों से संपर्क किया गया, मगर उन्होंने इस पर अपनी स्थिति स्पष्ट नहीं की।