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15 कॉलेजों, एचपीयू को मिली 60 करोड़ की इंफ्रास्ट्रक्चर ग्रांट

Sat, 26 May 2018 01:14 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
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प्रदेश के 15 डिग्री कॉलेजों और प्रदेश विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान के तहत इंफ्रास्टक्चर ग्रांट के तौर पर 60 करोड़ रुपये मिलेंगे। दिल्ली में हुई प्रोजेक्ट अप्रूवल बोर्ड की बैठक में ग्रांट देने को स्वीकृति दी गई। केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय के सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में रूसा के तहत हिमाचल की ओर से किए जा रहे कार्यों को देखते हुए ग्रांट देने का फैसला लिया गया।

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इंफ्रास्ट्रक्चर ग्रांट को कॉलेजों में नए भवन बनाने और पुराने भवनों को अपग्रेड करने पर खर्च किया जा सकेगा। प्रदेश के पांच कॉलेजों को यह ग्रांट पहली बार, जबकि नौ को दूसरी बार ग्रांट के तहत दो-दो करोड़ रुपये दिए जाएंगे। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय को इंफास्ट्रक्चर ग्रांट के तहत 20 करोड़ का बजट मिलेगा।

जबकि जिला चंबा में न्यू मॉडल कॉलेज बनाने के लिए 12 करोड़ रुपये मंजूर हुए हैं। जिला चंबा के किस कॉलेज को मॉडल कॉलेज बनाया जाएगा। यह आने वाले दिनों में तय होगा। हिमाचल के 46 कॉलेजों को अभी तक रूसा के तहत ग्रांट प्राप्त हो चुकी है। हिमाचल की ओर से स्टेट प्रोजेक्ट आफिसर रूसा डॉ. गोपाल संघाईक बैठक में मौजूद रहे।
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एचपीयू को 67 फीसदी पद भरने के आदेश- प्रोजेक्ट अप्रूवल बोर्ड की बैठक में एचपीयू को स्वीकृत पदों के सापेक्ष 67 फीसदी पद भरने के आदेश दिए हैं। वर्तमान में प्रदेश विश्वविद्यालय में 64 फीसदी पद भरे हुए हैं। शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए बोर्ड ने यह आदेश दिए हैं।

इन पांच कॉलेजों को पहली बार मिली ग्रांट- डिग्री कॉलेज पांवटा साहिब, कुल्लू, सोलन, एक्सिलेंस कॉलेज संजौली और सरस्वतीनगर को पहली बार रूसा के तहत इंफरास्ट्रक्चर ग्रांट के तहत दो-दो करोड़ रुपये का बजट मिलेगा।

इन नौ कॉलेजों को दूसरी बार मिलेगी ग्रांट- डिग्री कॉलेज हमीरपुर, धर्मशाला, मंडी, नालागढ़, ऊना, रामपुर, सीमा, चंबा और पालमपुर कॉलेज को दूसरी बार रूसा के तहत इंफरास्ट्रक्चर ग्रांट के तौर पर दो-दो करोड़ रुपये का बजट मिलेगा।

हिमालयी राज्यों को नैक ग्रेडिंग में मिलेगी छूट- देश के हिमालयी राज्यों को केंद्र सरकार नैक ग्रेडिंग में भी छूट देने जा रही है। वर्तमान में रूसा की ग्रांट प्राप्त करने के लिए 2.5 के स्कोर वाले कॉलेजों को नैक ग्रेडिंग मिलती है।

संभावित है कि जून या जुलाई में संभावित पीएबी की बैठक में इस स्कोर को केंद्र सरकार हिमालयी राज्यों के लिए कम कर सकती है। केंद्र अगर ऐसा फैसला लेती है तो प्रदेश के कई कॉलेजों को इसका लाभ होगा।

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