लॉकडाउन में खरीदारों की कमी होने से किसानों को गोभी के दाम न मिलने से भारी झटका लगा है। आलम यह है कि पांच से सात रुपये प्रति किलो गोभी को पैक करने वाला कॉर्टन किसानों को बाजार में 35 रुपये मिल रहा है। किसानों की गोभी खेतों में खराब हो गई है। अनेक किसानों ने गोभी पशुओं को खिलानी शुरू कर दी है। मंडी में नाचन, सराज, बल्ह, करसोग, सदर, सुंदरनगर, द्रंग, सरकाघाट समेत अनेक ब्लॉकों में गोभी पककर तैयार हो गई है। दाम न मिलने से किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। जिले के 10 ब्लॉकों में किसानों को गोभी के दाम न मिलने से करीब 2 करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ है।
किसानों खीमा राम, मुरारी, धर्मेंद्र, हेम सिंह, टेक सिंह, मतिधर, हिमाचली, मीरा, कृष्ण, लाभ सिंह और विकास ने बताया कि गोभी की नो डिमांड से उनको लाखों का नुकसान उठाना पड़ा है। पिछले साल किसानों को गोभी के दाम 20 रुपये तक प्रति किलो मिले थे। जो इस साल के रेट से 35 फीसदी अधिक रहा था। मगर इस साल लॉकडाउन में प्रवासी मजदूरों के वापस घर जाने और लोगों के बाजार न आने के कारण किसानों को गोभी के दाम नही मिल पाए हैं। मार्केट कमेटी के सचिव भूपेंद्र कुमार ने पुष्टि करते हुए बताया कि गत वर्ष की अपेक्षा किसानों को इस बार फूलगोभी के कम दाम मिलने लाखों का नुकसान हुआ है।