हाईकमान इस बात से नाराज है कि जिस नेता का नाम बीसीसी ने पार्टी टिकट के लिए धर्मशाला से प्रस्तावित किया था, वह आखिरी समय में हाईकमान के सामने कैसे मुकर गया? क्या बीसीसी ने सुधीर को विश्वास में लेना उचित नहीं समझा या बीसीसी ने उनसे चुनाव लड़ने के लिए पूछना जरूरी नहीं समझा।
सूत्रों के अनुसार हाईकमान यह भी विचार करने को विवश हो गया है कि जो नेता विधानसभा उपचुनाव में स्वास्थ्य कारणों से असमर्थता व्यक्त कर रहा है तो क्या उसकी एआईसीसी में सचिव के तौर पर सेवाएं ली जा सकती हैं?
बताते हैं कि इस मामले को लेकर पहले महासचिव केसी वेणुगोपाल प्रभारी रजनी पाटिल से विचार-विमर्श किया। इसके बाद वेणुगोपाल ने इस मामले पर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से भी मंथन किया। ऐसी स्थिति में हाईकमान कोई कार्रवाई कर सकता है।
धर्मशाला बीसीसी अध्यक्ष राजेश कपूर कहते हैं कि बीसीसी के 88 पदाधिकारियों और बूथ कमेटियों के अध्यक्षों ने लिखकर सुधीर को पार्टी टिकट देेने का प्रस्ताव भेजा।
इस बारे में एआईसीसीसी सचिव सुधीर से कैसे पूछ सकते थे। उनका कहना है कि धर्मशाला नगर निगम के महापौर देवेंद्र जग्गी ने भी समर्थन किया था। वह धर्मशाला में ही थे और उनका आवेदन शिमला कैसे पहुंचा।