राजधानी शिमला में मंगलवार सुबह सड़कों से बसें गायब होने से शहर के लोग परेशान रहे। घरों से दफ्तरों की ओर निकले कर्मचारियों और स्कूल कालेज के छात्रों को पैदल ही गंतव्य तक पहुंचना पड़ा। लोग बस स्टॉप पर बसों का इंतजार करते रहे लेकिन घंटों इंतजार के बाद भी बसें नहीं आईं। एक्का दुक्का बसें चलीं लेकिन उनमें भारी ओवरलोडिंग रही।
लोगों को खचाखच भरी बसों में भेड़ बकरियों की तरह सफर करना पड़ा। मंगलवार सुबह बालूगंज में घंटों बसें जाम में फंसी रही। इस कारण लोकल रूटों पर बसें लेट होने के कारण ओवरलोडिंग और अधिक बढ़ गई। मंगलवार को शहर में चलने वाली बसें स्कूली बच्चों को लेकर सुबह-सुबह पिकनिक पर रवाना हो गई।
शहर में लोकल रूटों पर चलने वाली करीब एक दर्जन बसें मंगलवार को अपने निर्धारित रूटों पर नहीं चलीं। रूट मिस करने से पहले शहर के निजी बस आपरेटरों ने स्पेशल परमिशन लेनी भी जरूरी नहीं समझी। एक्का-दुक्का बसों को छोड़कर अन्य सभी बसों ने बिना स्पेशल परमिशन के रूट मिस किए।
कार्रवाई का भरोसा
क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी प्रशांत देष्टा ने कहा कि बसों की किल्लत से लोगों को दिक्कत न झेलनी पड़े इसे ध्यान में रखते हुए समिति संख्या में ही बसों को स्पेशल परमिट दिए जाते हैं। मंगलवार को बिना परमिशन रूट मिस करने वाले बस आपरेटरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सुनिश्चित किया जाएगा कि भविष्य में लोगों को ऐसी दिक्कत न झेलनी पड़े।