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Shimla Traffic: बढ़ती आबादी के आगे सार्वजनिक परिवहन बेबस, पीक ऑवर्स में बसों में ठूंस-ठूंसकर सफर

Thu, 18 Jun 2026 11:36 AM IST
शिमला ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।

सार

शिमला में बढ़ती आबादी और पर्यटन के कारण सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर भारी दबाव है। 313 बसों और एचआरटीसी टैक्सी-टेंपो सेवाओं से रोजाना करीब 1.25 लाख लोग सफर कर रहे हैं। पीक ऑवर्स में बसों में ओवरलोडिंग आम हो गई है। पढ़ें पूरी खबर...
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बसों में ओवर लोडिंग: शिमला में बसों में कुछ इस तरह सफर करते हैं लोग। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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राजधानी शिमला में आबादी के बोझ और रोजाना आने वाले हजारों पर्यटकों के कारण शहर की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था अब नाकाफी साबित हो रही है। राजधानी में 313 सरकारी, निजी बसें और परिवहन निगम की टैक्सी, टेंपो सर्विस पर लाखों की आबादी निर्भर है। औसतन सवा लाख से अधिक स्थानीय लोग और पर्यटक इस परिवहन सेवा से हर रोज सफर करते हैं।

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यही वजह है कि सुबह और शाम के पीक ऑवर में बसों तथा एचआरटीसी, निजी बसों और निगम की टैक्सियों में जमकर ओवरलोडिंग हो रही है। सुबह और शाम के समय हजारों लोग बस स्टैंड से लेकर स्टॉपेज पर बसों का इंतजार करते रहते हैं। बसों की कमी के कारण पहले से ही ओवरलोड बसों में लोग खड़े होकर सफर करने को मजबूर है।

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शहर की आबादी ढाई लाख से अधिक है। शिमला के उन अंदरूनी और संकरे हिस्सों में जहां बड़ी बसें नहीं जा सकतीं, वहां एचआरटीसी की महज 39 में से 30 टैक्सियां (इलेक्ट्रिक और पेट्रोल, डीजल ) सेवाएं दे रही हैं। इन सीमित टैक्सियों पर रोजाना 6,000 यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने का दबाव है। इनमें भी सवारियां ओवरलोड होती हैं।

एचआरटीसी के क्षेत्रीय प्रबंधक अंकुर ठाकुर ने कहा कि लोगों को परिवहन सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए लगातार प्रयासरत है। पर्यटन सीजन में वाहनों का दबाव बढ़ने के कारण बसों के संचालन में कई बार दिक्कतें आती हैं। इसके बावजूद शहरवासियों को तय समय पर बसों की उपलब्धता की गई है।

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तीन डिपो में 170 सरकारी, 104 निजी बसें
शहर में आम लोगों की सवारी के रूप में परिवहन निगम के तीन डिपो में करीब 170 बसें और 104 के करीब निजी बसें चलाई जा रही हैं। निगम की तंग और प्रतिबंधित सड़कों पर विशेष परमिट के साथ 34 रूटों में 39 टैक्सी और टेंपो ट्रैवलर का सहारा है। शहर में करीब चार हजार निजी टैक्सियां चलती हैं। हिमाचल पथ परिवहन निगम की बसों में हर दिन करीब 51 हजार, टैक्सी और टेंपो ट्रैवलर में छह हजार लोग सफर करते हैं। निगम की चार्टर्ड बसों और निजी टैक्सी का स्कूली विद्यार्थियों को लाने-जाने में उपयोग हो रहा है। वाहनों में रोजाना 5,000 छात्र-छात्राएं सफर करते हैं।

सार्वजनिक परिवहन पर चरम सीमा पर है दबाव
राजधानी शिमला के सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर दबाव चरम सीमा पर है। शहर की संकरी सड़कें, भौगोलिक चुनौतियां और लगातार बढ़ती आबादी के बीच परिवहन व्यवस्था कम पड़ने लगी है। शहर में स्थित अधिकतर सरकारी निदेशालय, सचिवालय और प्रमुख केंद्र सरकार और निजी कंपनियों के कार्यालयों के साथ ही नामी स्कूलों के होने से आबादी का बोझ बढ़ रहा है। रोजाना एक लाख से अधिक लोग दफ्तरों, निजी संस्थानों में सेवाएं देने के साथ हजारों विद्यार्थी स्कूलों को आते-जाते हैं। सुबह और शाम के पीक ऑवर्स (दफ्तर और स्कूल के समय) में इन बसों में पैर रखने तक की जगह नहीं होती और ओवरलोडिंग के बीच सफर करना लोगों की मजबूरी बन चुका है।
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