तीन डिपो में 170 सरकारी, 104 निजी बसें
शहर में आम लोगों की सवारी के रूप में परिवहन निगम के तीन डिपो में करीब 170 बसें और 104 के करीब निजी बसें चलाई जा रही हैं। निगम की तंग और प्रतिबंधित सड़कों पर विशेष परमिट के साथ 34 रूटों में 39 टैक्सी और टेंपो ट्रैवलर का सहारा है। शहर में करीब चार हजार निजी टैक्सियां चलती हैं। हिमाचल पथ परिवहन निगम की बसों में हर दिन करीब 51 हजार, टैक्सी और टेंपो ट्रैवलर में छह हजार लोग सफर करते हैं। निगम की चार्टर्ड बसों और निजी टैक्सी का स्कूली विद्यार्थियों को लाने-जाने में उपयोग हो रहा है। वाहनों में रोजाना 5,000 छात्र-छात्राएं सफर करते हैं।
सार्वजनिक परिवहन पर चरम सीमा पर है दबाव
राजधानी शिमला के सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर दबाव चरम सीमा पर है। शहर की संकरी सड़कें, भौगोलिक चुनौतियां और लगातार बढ़ती आबादी के बीच परिवहन व्यवस्था कम पड़ने लगी है। शहर में स्थित अधिकतर सरकारी निदेशालय, सचिवालय और प्रमुख केंद्र सरकार और निजी कंपनियों के कार्यालयों के साथ ही नामी स्कूलों के होने से आबादी का बोझ बढ़ रहा है। रोजाना एक लाख से अधिक लोग दफ्तरों, निजी संस्थानों में सेवाएं देने के साथ हजारों विद्यार्थी स्कूलों को आते-जाते हैं। सुबह और शाम के पीक ऑवर्स (दफ्तर और स्कूल के समय) में इन बसों में पैर रखने तक की जगह नहीं होती और ओवरलोडिंग के बीच सफर करना लोगों की मजबूरी बन चुका है।