कोरोना काल में जयराम सरकार ने राहत की बजाय आम आदमी को महंगाई के झटके ही दिए हैं। मंत्रिमंडल बैठक में सरकार ने न्यूनतम बस किराये में दो रुपये की वृद्धि को मंजूरी दी है। इससे पहले भी सरकार ने कई ऐसे फैसले लिए हैं, जिनसे आम आदमी की मुश्किलें बढ़ी हैं। खास बात यह है कि इस सारी कवायद के दौरान सरकार की ओर से सरकारी खर्च घटाने को जमीन पर एक भी ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
विधायकों व मंत्रियों के वेतन कटौती को छोड़ दें तो सरकारी अधिकारियों-मंत्रियों और मुख्यमंत्री तक के फ्लीट में गाड़ियों की संख्या पहले की ही तरह रही। हाल में कैबिनेट की एक बैठक के दौरान सरकार के कुछ आला अधिकारियों ने सरकार से खर्च घटाने पर खास ध्यान देने की बात कही तो सलाह को हाथों हाथ लेने के बजाय पूरी कैबिनेट ने ही अपने सियासी लाभ-हानि के लिए अफसरों के मुंह बंद करा दिए।