प्रदेश कांग्रेस ने बस किराये में सरकार की ओर से की गई 25 फीसदी बढ़ोतरी का विरोध किया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर ने किराया वृद्धि को पूरी तरह जनविरोधी बताते हुए इसकी कड़ी आलोचना की है। चेतावनी दी कि सरकार ने यह निर्णय वापस नहीं लिया तो कांग्रेस इसके खिलाफ सड़कों पर उतरेगी। राठौर ने इस किराया वृद्धि पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि एक तरफ सरकार डीजल-पेट्रोल के दामों में वृद्धि कर लोगों को लूट रही है तो दूसरी तरफ आज उसने एक और झटका दे दिया है। कोरोना संकटकाल में सरकार का यह निर्णय पूरी तरह जनविरोधी है और कांग्रेस इसका पूरा विरोध करती है।
अनुशासन समिति की 22 को प्रस्तावित बैठक स्थगित
प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अनुशासन समिति की 22 जुलाई को होने वाली बैठक स्थागित कर दी गई है। बैठक की अगली तारीख अब बाद में तय की जाएगी। कांग्रेस महासचिव रजनीश किमटा ने बताया कि प्रदेश में बढ़ते कोरोना संक्रमण और शिमला शहर के कई भागों को प्रशासन ने सील किया है, उसे देखते प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने इस बैठक को स्थागित करने का निर्णय लिया है।
भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने 25 प्रतिशत बस किराया में की गई वृद्धि के निर्णय का विरोध किया है। सरकार से मांग करते हुए जनता पर आर्थिक बोझ लादने के निर्णय को तुरंत वापस लेने को कहा है। पार्टी के राज्य सचिवालय सदस्य संजय चौहान ने कहा कि अगर किराया बढ़ोतरी वापस नहीं ली गई तो इस जनविरोधी निर्णय के विरुद्ध प्रदेशव्यापी जनांदोलन चलाया जाएगा।चौहान ने कहा कि बस किराया वृद्धि के निर्णय ने प्रदेश सरकार व इनके मंत्रियों के दोहरे चरित्र को भी उजागर किया है। बीती कैबिनेट बैठक के बाद भी बस किराया वृद्धि को लेकर जब विरोध हुआ था तो सरकार में मुख्यमंत्री, परिवहन मंत्री व अन्य मंत्री सभी निरंतर यही बयान दे रहे थे कि प्रदेश में बस किराया नहीं बढ़ाया जाएगा। लेकिन गुपचुप तरीके से चंद लोगों के दबाव में आकर बस किराया वृद्धि को अंजाम देकर प्रदेशवासियों के साथ इस संकट की घड़ी में बड़ा धोखा किया है।
उन्होंने कहा कि कोविड 19 के चलते सरकार द्वारा लॉकडाउन व कर्फ्यू के कारण आज देश व प्रदेश में करीब चार माह पूरे होने जा रहे हैं। इस दौरान लगभग हर क्षेत्र प्रभावित हुए हैं, जिसके चलते बड़े पैमाने पर रोजगार समाप्त हुआ है। प्रदेश में भी लाखों लोगों को रोजगार से वंचित होना पड़ा है और इनके समक्ष रोजी-रोटी का बड़ा संकट हो गया है। सरकार ने राशन में दिया जा रहा 80 करोड़ व बिजली में 100 करोड़ रुपये के उपदान को समाप्त कर दिया है। डीजल व पेट्रोल की कीमतों में 20 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि की है। मालभाड़े में 20 से 25 प्रतिशत तक की गई है। इससे महंगाई की मार जनता पर पड़ी है। ऐसे में जनता का जब रोजगार चला गया है और कारोबार बिल्कुल बंद रहा है तो इस विषम परिस्थिति में सरकार राहत देने के बजाय सेवाओं की दरों में वृद्धि कर जनता पर महंगाई का बोझ बढ़ा रही है।