हिमाचल प्रदेश में अब स्कूल प्रबंधन समिति के बिना स्कूलों में किसी भी प्रकार का भवन निर्माण और मरम्मत कार्य नहीं हो सकेगा। बजट सत्र के दौरान विधानसभा सदन में मामला उठने और कई जिलों से इस बाबत शिकायतें मिलने के बाद प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय ने एसएमसी के बिना निर्माण व मरम्मत कार्यों पर रोक लगा दी है। एसएमसी को दरकिनार कर कई स्कूलों के शिक्षकों पर अपनी मर्जी से भवन निर्माण और मरम्मत करवाने के आरोप हैं। निदेशालय ने सभी जिला उपनिदेशकों को इस संदर्भ में पत्र जारी कर अब इन कार्यों में संलिप्त पाए जाने या व्यवधान उत्पन्न करने वाले शिक्षकों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश जारी किए हैं। निदेशालय के अनुसार कई स्कूलों में शिक्षकों ने अपने मूल कार्य विद्यार्थियों की पढ़ाई को छोड़कर भवन निर्माण पर ही ध्यान दिया हुआ है। स्वीकृत बजट को निर्धारित कार्य की जगह अपनी पसंद के हिसाब से खर्चा जा रहा है।
विधानसभा में भी कई विधायकों ने यह मामला उठाया। इस पर कड़ा संज्ञान लेते हुए प्रारंभिक शिक्षा निदेशक ने जिला उपनिदेशकों को जारी पत्र में स्पष्ट किया है कि राजकीय प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों में भवन निर्माण और मरम्मत कार्य के लिए जो राशि स्वीकृत की जाती है, उसका प्रयोग संबंधित स्कूल की स्कूल प्रबंधन समिति से ही करवाया जाए। मार्च 2010 की अधिसूचना का हवाला देते हुए कहा कि स्कूल प्रबंधन समिति का गठन इस उद्देश्य से ही किया गया है। स्कूल प्रबंधन समिति ही तय करेगी कि किस प्रकार से भवन निर्माण और मरम्मत होगी, इसकी देखरेख का जिम्मा भी इन्हीं का होगा। निदेशक घनश्याम चंद ने जिला उपनिदेशकों को भवन निर्माण और मरम्मत कार्य का निरीक्षण समय-समय पर करने को कहा है। स्वीकृत राशि का प्रमाणपत्र भी निदेशालय भेजने के निर्देश दिए हैं।