हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले में ईंट भट्ठे होने के बावजूद यहां ईंटें महंगी मिल रही हैं। पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने के साथ-साथ कोयले के दाम में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है। ईंट भट्ठों पर ईंटें पकाने के लिए कोयले का इस्तेमाल होता है। कोयले का रेट प्रति टन नौ हजार रुपये से बढ़कर 25 हजार रुपये हो गया है।
घर बनाने का सपना अब प्रतिदिन महंगा होता जा रहा है। अब कोयले के दाम बढ़ने से घर बनाना महंगा हो गया है। कोयले के दामों में दोगुना से अधिक बढ़ोतरी होने पर ईंट के दाम भी प्रति हजार 1500 से 2000 रुपये तक बढ़ गए। सीमेंट, सरिया के दाम पहले ही बढ़े हुए हैं। हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले में ईंट भट्ठे होने के बावजूद यहां ईंटें महंगी मिल रही हैं। पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने के साथ-साथ कोयले के दाम में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है। ईंट भट्ठों पर ईंटें पकाने के लिए कोयले का इस्तेमाल होता है। कोयले का रेट प्रति टन नौ हजार रुपये से बढ़कर 25 हजार रुपये हो गया है।
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इसका असर अब कोयले से चलने वाले उद्योगों के उत्पाद पर दिखने लगा है। प्रति हजार ईंट के लिए अब उपभोक्ताओं का 6500 से 7000 रुपये चुकाने पड़ रहे हैं। ईंट भट्ठे के मालिक रविंद्र कुमार, सोमदत्त, अश्वनी कुमार ने कहा कि उन्हें कोयला महंगा मिल रहा है। इस कारण पुराने रेट पर ईंट बेचना मुश्किल हो रहा है। वहीं, ईंट भट्ठा एसोसिएशन के प्रधान पोहू लाल भारद्वाज ने बताया कि कोयले के दाम बढ़ने का असर ईंट के दाम पर पड़ रहा है। बिना कोयले से ईंट निर्माण संभव नहीं है। महंगा कोयला लेकर ही ईंट उत्पादन किया जा रहा है। आने वाले समय में यदि कोयले के दाम गिरते हैं तो ईंट के दाम घट सकते हैं।