मोहाल का नाम नहीं लिखा, तो डीसी सड़क निर्माण को पैसा जारी नहीं करेंगे। यह व्यवस्था विकेंद्रीयकृत प्लान के बजट पर रहेगी। राज्य सरकार ने इस संबंध में सभी उपायुक्तों को निर्देश जारी किए हैं। इसका मकसद बजट के आवंटन के बाद इसके खर्च में होने वाली गड़बड़ियों को रोकना है। इससे यह भी होगा कि जो पैसा जहां के लिए मंजूर हुआ है, वह उसी जगह पर खर्च किया जा सकेगा।
अगले साल से तो विकेंद्रीयकृत और केंद्रीयकृत योजना का भेद ही खत्म किया जा रहा है। प्रदेश में पंचायतों के माध्यम से बनाई जाने वाली छोटी संपर्क सड़कों के लिए उपायुक्तों को बजट जारी करने के लिए अधिकृत किया गया है। डीसी विकेंद्रीयकृत प्लान, विधायक क्षेत्र विकास निधि, राहत सहित कई मदों से यह बजट जारी करते हैं।
उपायुक्तों की ओर से यह बजट ग्राम सभा के प्रस्तावों पर जारी किया जाता है। इनके साथ एस्टीमेट भी लगाने होते हैं। अभी तक जब भी पंचायत की ओर से प्रस्ताव जारी किया जाता तो संपर्क सड़क को कोई भी नाम दिया जाता था। इसमें कई बार किसी के घर से किसी नाले तक ऐसे नाम भी रहे हैं। यह नाम तो अब भी दिए जा सकेंगे। पर मोहाल का भी जिक्र करना होगा कि किस मोहाल से कहां तक यह सड़क बननी है।
मोहाल राजस्व का एक शब्द है। योजना सलाहकार वासु सूद ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि विकेंद्रीयकृत प्लान के पैसे को केवल तभी मंजूर किया जा सकेगा। अगर एस्टीमेट के साथ मोहाल का नाम लिखा हुआ होगा तो ही डीसी बजट जारी करेंगे, वरना नहीं।