यूं तो यह तैयारी नवंबर महीने में ही शुरू कर दी गई थी। उस वक्त बतौर अतिरिक्त मुख्य सचिव वित्त अनिल खाची ने कई विभागों से साथ लगातार बैठकें कीं। उनकी प्राथमिकताएं पूछीं। इसके बाद खाची मुख्य सचिव बन गए तो प्रधान सचिव वित्त प्रबोध सक्सेना बनाए गए। इस बीच प्रबोध सक्सेना भी खूब सक्रिय रहे।
बजट सत्र की तिथियां तय होने के बाद यह अधिकारी बजट तैयार करने की प्रक्रिया में पूरी शिद्दत से जुट गए हैं। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की महत्वाकांक्षी ग्लोबल इन्वेस्टर्स मीट के बाद एक लाख करोड़ रुपये से अधिक के एमओयू निवेशकों के साथ हस्ताक्षरित हो चुके हैं। ऐसे मेें सरकार का ध्यान इन्हें धरातल पर उतारने का होगा। इसके लिए अगले बजट में भी खास प्रावधान किए जाने की तैयारी है।