कार्यक्रम में दलाईलामा ने कहा कि विपरीत परिस्थितियों में मैं तिब्बत से भागा था। मैं खुशी और गम दोनों भावनाएं महसूस कर रहा हूं। तब हमें पता नहीं था कि अगले 40 से 50 वर्षों में क्या होगा लेकिन आज हम निर्वासन का 60वां वर्ष मना रहे हैं।
भारत ने मेजबान के रूप में हमें समर्थन दिया और दयालुता दिखाई। शरणार्थी के रूप में हमें व्यावहारिक और यथार्थवादी होना चाहिए। मैक्लोडगंज मुख्य मंदिर में कार्यक्रम के दौरान हजारों तिब्बतियों ने भारत का मेहमानवाजी के लिए आभार जताया।
चीन को नाराज न करने की कूटनीति चलने के बाद आखिरकार भारत सरकार से केंद्रीय संस्कृति राज्य मंत्री महेश शर्मा, भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव राम माधव, सांसद शांता कुमार और हिमाचल सरकार के मंत्री किशन कपूर ने कार्यक्रम में भाग लिया।
इस अवसर पर तिब्बत समस्या के कोर ग्रुप के राष्ट्रीय संयोजक आरके खरिमे, अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू की माता रिंचेन डोलमा भी मौजूद रहे।
केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन राज्य मंत्री डॉ. महेश शर्मा ने कहा कि हम तिब्बतियों को भारत का अंग मानते हैं। साथ ही हम प्रार्थना करते हैं कि दलाईलामा की उनकी मातृभूमि में सफल वापसी हो। भारत-तिब्बत मुद्दे का समर्थन करने के लिए प्रतिबद्ध है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी तिब्बती लोगों के बारे में चिंतित हैं। भारत और तिब्बत के रिश्ते वर्षों पुराने हैं। इन्हें किसी तराजू में नहीं तोला जा सकता। भारत और तिब्बत बड़े और छोटे भाई सरीखे हैं। ऐसे रिश्तों में धन्यवाद की जरूरत नहीं होती।
उन्होंने कहा कि शरणार्थी शब्द पीड़ादायक है। तिब्बती हमारे मेहमान नहीं पारिवारिक सदस्य हैं। जिस वर्ष दलाईलामा भारत में आए थे उसकी वर्ष मेरा भी जन्म हुआ था। उन्होंने कहा कि दलाईलामा का तिब्बत वापसी का सपना पूरा हो, इसके लिए वह प्रार्थना करते हैं।
भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव राम माधव ने तिब्बत मुद्दे के शांतिपूर्वक हल का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि हम कामना करते हैं कि दलाईलामा की तिब्बत वापस लौटने की इच्छा पूरा हो।
उन्होंने कहा कि देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू से लेकर नरेंद्र मोदी ने वन चाइना पॉलिसी का समर्थन किया है। भारत और तिब्बत के बीच राजनीतिक रिश्ता कम हो सकता है लेकिन आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और दोस्ताना संबंध बहुत गहरा है।
उन्होंने कहा कि भारत और तिब्बत एक दूसरे के आध्यात्मिक भाई हैं। उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध और महात्मा गांधी की तरह अब पिछले 60 वर्षों से भारत दलाईलामा की भूमि बनी हुई है।
सांसद शांता कुमार ने कहा कि भगवान चीन का हृदय परिवर्तन करे। दलाईलामा ने कभी भी टकराव की बात नहीं की। वह तो हमेशा स्वायत्तता की बात करते हैं। चीन को सम्मानपूर्वक दलाईलामा को तिब्बत में ले जाकर पोटाला महल में उनकी गद्दी पर बैठाना चाहिए।
तिब्बत के अंदर हालात सामान्य नहीं : चतुर्वेदी
कांग्रेस के एमपी सत्यव्रत चतुर्वेदी ने कहा कि तिब्बत के अंदर हालात सामान्य नहीं हैं। आत्मदाह गहरे चिंतन का विषय है। तिब्बत को धार्मिक आजादी और सांस्कृतिक स्वायत्तता मिलनी चाहिए। चीन मानवीय मूल्यों का सम्मान करे।
दलाईलामा ने 7 असम राइफल्स से सेवानिवृत्त नरेन चंद्रा दास को सम्मानित किया। नरेन दास असम राइफल के उन जवानों में से एक हैं जिन्होंने 31 मार्च 1959 को दलाईलामा की भारत में अगवानी की थी।
नरेन दास ने कहा कि वह पहली बार धर्मशाला आए हैं। उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं है। अच्छा लग रहा है कि आज दलाईलामा पूरी दुनिया में शांति का पैगाम फैला रहे हैं।
तिब्बत बर्बाद हो रहा : सांग्ये
निर्वासित तिब्बत सरकार के पीएम डा. लोबसंग सांग्ये ने कहा कि आज यह जरूरी नहीं कि कार्यक्रम में कौन आया और कौन नहीं। आज 6 लाख तिब्बतियों के लिए खुशी मनाने का दिन है। सांग्ये ने कहा कि तिब्बत में मानवीय मूल्यों का हनन हो रहा है। हजारों तिब्बतियों संघर्ष करते करते मर गए। तिब्बत बर्बाद हो रहा है।